केजरीवाल की याचिका खारिज, संजय राउत बोले- ‘इस हद तक…’
मुंबई: आबकारी मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के फैसले को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार (20 अप्रैल) को कोर्ट द्वारा केजरीवाल की याचिका खारिज किए जाने के बाद, संजय राउत ने न्यायपालिका की निष्पक्षता और महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा है।
'न्याय व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति'
मंगलवार (21 अप्रैल) को मीडिया से रूबरू होते हुए संजय राउत ने अदालत के रुख पर नाराजगी व्यक्त की। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- विश्वास का अभाव: राउत ने कहा कि यदि किसी पक्ष को जज की निष्पक्षता पर संदेह है और उससे जुड़े साक्ष्य दिए गए हैं, तो सुनवाई से न हटना दुर्भाग्यपूर्ण है।
- हितों का टकराव: उन्होंने आरोप लगाया कि जब किसी खास विचारधारा या सरकार से लाभ लेने की बात सामने आती है, तो न्याय की गरिमा प्रभावित होती है।
- SC से हस्तक्षेप की मांग: राउत ने इस पूरे विषय पर सर्वोच्च न्यायालय से दखल देने की अपील की है।
'उड़ता भाजपा' और ड्रग्स का मुद्दा
संजय राउत ने महाराष्ट्र के वर्तमान हालात पर कटाक्ष करते हुए प्रदेश भाजपा को 'उड़ता भाजपा' करार दिया।
- नशे का कारोबार: उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक जैसे बड़े शहरों में ड्रग्स की बरामदगी लगातार बढ़ रही है, जिससे राज्य की स्थिति चिंताजनक हो गई है।
- महिला आरक्षण पर घेरा: उन्होंने भाजपा के मोर्चे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब महिला आरक्षण बिल 2023 में ही पारित हो चुका है और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हो चुके हैं, तो अब इस मुद्दे पर प्रदर्शन करने का क्या औचित्य है।
खुली बहस की चुनौती
मुख्यमंत्री की ओर से दी गई 'ओपन डिबेट' की चुनौती पर राउत ने कहा:
- उन्होंने भाजपा को सलाह दी कि वे पहले लोकसभा में हुई चर्चाओं का अध्ययन करें।
- राउत ने सीधे तौर पर कहा कि यदि डिबेट करनी है, तो उनके स्तर के नेता को सामने लाएं। उन्होंने इस बहस के लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रित करने की बात भी कही।
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