बिना ओटीपी और लिंक क्लिक किए बैंक मैनेजर के खाते से लाखों की ठगी
जबलपुर: बैंक के रीजनल वेल्थ मैनेजर के साथ अनोखी साइबर ठगी, बिना ओटीपी बताए और बिना लिंक क्लिक किए खाते से उड़े लाखों रुपए
मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ खुद बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञ और बैंक ऑफ बड़ौदा के रीजनल वेल्थ मैनेजर आशीष चंद्रा ठगी का शिकार हो गए। स्नेह नगर स्थित इंद्रा पार्क के निवासी आशीष चंद्रा के साथ हुई यह धोखाधड़ी इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया था। उन्होंने न तो अपने मोबाइल पर आए किसी ओटीपी को किसी के साथ साझा किया और न ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया, इसके बावजूद साइबर अपराधियों ने उनके खाते में सेंध लगा दी। मदन महल थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और इस रहस्यमयी तरीके से अंजाम दी गई डिजिटल चोरी की गहन जांच शुरू कर दी है।
क्रेडिट कार्ड ब्लॉक होने के बावजूद अंजाम दी गई हजारों की अवैध ट्रांजेक्शन
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आशीष चंद्रा का क्रेडिट कार्ड पहले से ही ब्लॉक था। पीड़ित ने बताया कि 20 अप्रैल को कुछ संदिग्ध संदेश मिलने के बाद उन्होंने सुरक्षा के तौर पर अपना कार्ड बंद करवा दिया था और उसे दोबारा सक्रिय नहीं किया था। इसके बावजूद, 25 अप्रैल की सुबह उनके मोबाइल पर दो ओटीपी आए और महज 11 मिनट के भीतर उनके कार्ड से दो बड़ी किस्तों में कुल 1,62,781 रुपये निकाल लिए गए। पहली ट्रांजेक्शन सुबह 9:46 बजे और दूसरी 9:57 बजे 'टाटा पेमेंट लिमिटेड मुंबई' के नाम पर की गई। एक बैंक मैनेजर के बंद कार्ड से इस तरह पैसे निकलना बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली और साइबर सुरक्षा की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बिना मानवीय चूक के हुई डिजिटल सेंधमारी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाया
आमतौर पर साइबर ठगी के मामलों में पीड़ित द्वारा ओटीपी साझा करने या किसी लिंक पर क्लिक करने जैसी मानवीय चूक सामने आती है, लेकिन इस केस ने विशेषज्ञों को भी सोच में डाल दिया है। आशीष चंद्रा ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि वे बैंकिंग सुरक्षा को लेकर पूरी तरह जागरूक थे और उन्होंने किसी भी अनजान व्यक्ति को जानकारी नहीं दी थी। पुलिस अब इस तकनीकी पहलू की जांच कर रही है कि आखिर अपराधियों ने बिना कार्ड अनब्लॉक किए और बिना ओटीपी प्राप्त किए भुगतान की प्रक्रिया को कैसे पूरा किया। अंदेशा जताया जा रहा है कि यह 'सिम क्लोनिंग' या किसी उन्नत मैलवेयर के जरिए किया गया उच्च स्तरीय तकनीकी हमला हो सकता है जिसे केवल अनुभवी साइबर अपराधी ही अंजाम दे सकते हैं।
मदन महल पुलिस द्वारा अपराध पंजीबद्ध और आरोपियों की तलाश के लिए तकनीकी जांच तेज
ठगी का शिकार होने के तुरंत बाद आशीष चंद्रा ने मदन महल थाने पहुँचकर अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात जालसाजों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस की साइबर टीम अब उन ट्रांजेक्शन रूट्स और डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा कर रही है जिनके माध्यम से पैसा मुंबई स्थित गेटवे तक पहुँचा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सामान्य ठगी से हटकर है और इसमें किसी तकनीकी खामी या बैंक के डेटा ब्रिज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। आरोपियों तक पहुँचने के लिए बैंक के सर्वर रिकॉर्ड्स और भुगतान गेटवे की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है ताकि इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके और पीड़ित को न्याय मिल सके।
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