विधानसभा में सवाल जवाब पर हुआ हंगामा
जयपुर ।16 वीं विधानसभा के तीसरे सत्र की कार्यवाही गुरुवार को प्रश्नकाल के साथ शुरू हुई. प्रश्नकाल में दूसरे दिन भी लगातार मुख्य सवाल के जवाब को पढ़ा हुआ माना जाने को लेकर पक्ष-विपक्ष में जमकर बहस हुई. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने आसन की व्यवस्था का हवाला देते हुए बहस को शांत किया. इसके साथ ही प्रश्नकाल में साइबर अपराध, टूटी सडक़ें, छात्रवृत्ति, भ्रष्टाचार, अवैध शराब सहित का मुद्दा उठाया। प्रश्न कल के दौरान विधायक ललित मीणा ने राशन डीलरों के विरुद्ध शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया।
मीणा के सवाल का खाद्यमंत्री सुमित गोदारा ने जैसे ही जवाब देना शुरू किया तो अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि सवाल का लिखित उत्तर को पढ़ा हुआ मान कर पूरक प्रश्न किया जाए. इसको लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच बहस शुरू हो गई. सत्ता पक्ष की ओर जवाब पढऩे की बात को गई तो नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली खड़े हुए कहा कि सत्ता पक्ष आसन की व्यवस्था को चुनौती दे रहा है. इस पर कुछ समय के लिए सदन में हंगामा हो गया. बढ़ते हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी खड़े हुए और कहा कि मैंने राज्यसभा, लोकसभा की कार्रवाई का आंकलन किया, राज्यसभा सचिवालय से भी पता किया. वहां पर भी ऐसा ही होता है. प्रश्न पुकारने के बाद अगर प्रश्न का उत्तर मिल गया तो फिर सीधा पूरक प्रश्न पूछा जाता है. आसन से दी गई व्यवस्था का पालन सभी सदन के सदस्यों को करना होगा।प्रश्नकाल में विधायक चंद्रभान सिंह चौहान ने चित्तौडग़ढ़ विधानसभा क्षेत्र में दर्ज साइबर प्रकरण पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया कि जब व्यक्ति थाने में जाता है तब कहा जाता है कि 2 लाख से ज्यादा का अगर मामला है तो आप साइबर थाने में जाएं. क्या यह भेदभाव उचित है? क्या रिपोर्ट थाने में दर्ज नहीं हो सकती? चंद्रभान के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि कुल 3 दर्ज मामले हैं, जिसमें 10 में चालान हुआ 17 में एफआर लगी. 2 करोड़ से ज्यादा का मामला है, उसमें एक करोड़ के करीब रिकवरी हुई. मंत्री ने कहा कि 3 लाख की लिमिट है, अगर 3 लाख से ज्यादा का मामला है तो फिर साइबर थाने में दर्ज होगा. इसके बाद पूरक प्रश्न में चंद्रभान कहा कि 2 लाख से कम है तो उसका भी मामला दर्ज होना चाहिए. इसके बाद अध्यक्ष ने कहा कि ये सदन के सदस्य का आग्रह से सरकार विचार करें।
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