तनाव और खराब लाइफस्टाइल बढ़ा रहे हाइपरटेंशन का खतरा
आधुनिक दौर की अस्त-व्यस्त जीवनशैली, खान-पान की गलत आदतें, दफ्तरों में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने की मजबूरी और लगातार बढ़ता मानसिक तनाव—इन सबने मिलकर कई गंभीर बीमारियों को बुलावा दे दिया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से कई व्याधियां ऐसी हैं जो शरीर में बिना किसी बड़े लक्षण के प्रवेश करती हैं और अंदर ही अंदर अंगों को खोखला कर देती हैं। चिकित्सा जगत में 'हाइपरटेंशन' यानी हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) को एक ऐसे ही 'साइलेंट किलर' (खामोश हत्यारा) के रूप में देखा जाता है, जो इंसान को मौत के मुंह तक ले जा सकता है।
उच्च रक्तचाप की यह समस्या दिल के दौरे (हार्ट अटैक) से लेकर ब्रेन स्ट्रोक, किडनी फेलियर और आंखों की रोशनी जाने तक के लिए जिम्मेदार हो सकती है। यदि वक्त रहते इस पर काबू न पाया जाए या उचित चिकित्सकीय परामर्श न लिया जाए, तो यह जानलेवा साबित होता है। दुर्भाग्यवश, एक बड़ी आबादी को लंबे समय तक यह अहसास ही नहीं होता कि उनका ब्लड प्रेशर असामान्य है और जब तक इस बीमारी का पता चलता है, तब तक शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को भारी क्षति पहुंच चुकी होती है।
इसी घातक बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने और समय पर जांच के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से हर साल 17 मई को 'विश्व उच्च रक्तचाप दिवस' (World Hypertension Day) मनाया जाता है।
भारत में युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है यह बीमारी
वैश्विक स्तर पर आंकड़ों को देखें तो इस समय दुनिया भर में करीब 1.4 अरब लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं।
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भारत की डरावनी स्थिति: देश में स्थिति बेहद गंभीर है, जहाँ लगभग हर चौथा वयस्क (एडल्ट) उच्च रक्तचाप की चपेट में है। वर्तमान में करीब 22 करोड़ भारतीय इस बीमारी से जूझ रहे हैं।
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अज्ञानता है सबसे बड़ी वजह: सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पीड़ित आबादी में से लगभग 27 प्रतिशत लोगों को इस बात का अंदाजा तक नहीं है कि वे हाइपरटेंशन के मरीज हैं।
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युवाओं पर खतरा: पहले इसे केवल बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब नई दिल्ली सहित देश के अन्य बड़े शहरों में 30 साल से कम उम्र के कामकाजी युवा भी इसके शिकार हो रहे हैं। शारीरिक निष्क्रियता, अत्यधिक जंक फूड, भोजन में नमक की अधिक मात्रा, धूम्रपान, शराब का सेवन और नींद की कमी ने इस खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है।
शरीर के भीतर कैसे नुकसान पहुंचाता है हाई बीपी?
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च रक्तचाप सीधे तौर पर शरीर की रक्त वाहिकाओं (धमनियों) पर गहरा दबाव डालता है। जब किसी व्यक्ति को हाइपरटेंशन होता है, तो उसकी धमनियों की दीवारों पर बहने वाले खून का दबाव लगातार मानक से अधिक बना रहता है। इस अतिरिक्त दबाव के कारण दिल को पूरे शरीर में ब्लड पंप करने के लिए क्षमता से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धमनियों की बेहद नाजुक अंदरूनी परत क्षतिग्रस्त हो जाती है।
चिकित्सीय मानकों के अनुसार, ब्लड प्रेशर को 'मिलीमीटर ऑफ मर्करी' (mm Hg) में मापा जाता है। सामान्य तौर पर यदि किसी का ब्लड प्रेशर 130/80 mm Hg या उससे ऊपर लगातार बना रहता है, तो उसे हाइपरटेंशन की श्रेणी में रखा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हर साल दुनिया भर में लाखों मौतों के पीछे सीधे या परोक्ष रूप से यही बीमारी जिम्मेदार होती है।
लोग क्यों नहीं पहचान पाते इसके लक्षण?
हाइपरटेंशन का सबसे पेचीदा पहलू यह है कि इसके शुरुआती चरण में शरीर में कोई दर्द या विशेष बेचैनी महसूस नहीं होती। आम लोगों में यह भ्रांति है कि जब तक सिर में तेज दर्द, चक्कर आना या कमजोरी जैसे लक्षण न दिखें, तब तक उनका ब्लड प्रेशर बिल्कुल सामान्य है। नियमित रूप से हेल्थ चेकअप न कराने की आदत के कारण यह बीमारी शरीर के भीतर दबी रहती है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता की भारी कमी और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी एक बड़ा कारण है।
खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये उपाय
डॉक्टरों के मुताबिक, भोजन में सोडियम (नमक) की अधिक मात्रा हाइपरटेंशन का सबसे बड़ा कारण है। एक सामान्य व्यक्ति को दिनभर में 5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए, लेकिन फास्ट फूड, चिप्स, पैकेट्स वाले स्नैक्स और सॉस के जरिए लोग इससे कहीं अधिक मात्रा में सोडियम खा रहे हैं।
बचाव के मुख्य तरीके:
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नमक पर नियंत्रण: खाने में ऊपर से नमक लेना बंद करें। कम नमक खाने से धमनियों पर रक्त का दबाव कम होता है।
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संतुलित आहार: अपने दैनिक भोजन में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा (लो-फैट) वाले डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल करें। यह दिल को दुरुस्त रखता है।
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नियमित व्यायाम: शरीर को एक्टिव रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट तक वॉक, योग, साइकिलिंग या कसरत जरूर करें।
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मानसिक शांति: तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान (मेडिटेशन) करें, 7-8 घंटे की गहरी नींद लें और देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन का इस्तेमाल करने से बचें।
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