सुनेत्रा पवार की स्थिति पर राजनीतिक हलचल, दो नेताओं की महत्वपूर्ण मीटिंग
मुंबई। महाराष्ट्र की सत्ताधारी राजनीति के केंद्र में मौजूद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान और कलह ने अब एक नया और बेहद दिलचस्प मोड़ ले लिया है। जब से सुनेत्रा पवार ने दल की कमान अपने हाथों में ली है, तभी से सांगठनिक फेरबदल और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी को लेकर सुगबुगाहट का दौर चरम पर पहुंच गया है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में यह कयास बेहद तेजी से लगाए जा रहे हैं कि पार्टी के दो सबसे कद्दावर और अनुभवी चेहरों, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को सोची-समझी रणनीति के तहत मुख्यधारा से अलग कर हाशिए पर धकेला जा रहा है, जिसने पार्टी के भीतर एक बड़े असंतोष और बगावत की पृष्ठभूमि तैयार कर दी है।
सांगठनिक सूची से बड़े चेहरों की विदाई और आंतरिक मतभेद हुए उजागर
पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान को उस समय और हवा मिल गई जब राकांपा के नवनियुक्त पदाधिकारियों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक की गई। इस सूची में प्रफुल्ल पटेल जैसे राष्ट्रीय कद के नेता का नाम न होना और प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे सुनील तटकरे को भी कोई बड़ी जिम्मेदारी न मिलना राजनीतिक पंडितों को हैरान कर रहा है। इन दोनों ही वरिष्ठ नेताओं और नए नेतृत्व के बीच कड़वाहट इस कदर बढ़ चुकी है कि पार्टी के भीतर अब अनुशासन और एकता के बड़े-बड़े दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।
पुराने खेमे की ओर झुकाव और शरद पवार के आवास पर गुप्त मुलाकातों का दौर
पार्टी में खुद को किनारे किए जाने से आहत दोनों ही दिग्गज नेताओं ने अब अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए पुरानी कड़वाहटों को भुलाकर राकांपा के संस्थापक शरद पवार के मुंबई स्थित 'सिल्वर ओक' आवास का रुख कर लिया है। बेहद पुख्ता राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, एक तय रणनीति के तहत पहले प्रफुल्ल पटेल ने शरद पवार से एकांत में लंबी बातचीत की और ठीक उसी दिन कुछ ही घंटों के अंतराल पर सुनील तटकरे भी अचानक पवार के घर जा पहुंचे। प्रफुल्ल पटेल द्वारा वर्तमान उठापटक पर सार्वजनिक रूप से साधी गई चुप्पी और उसके तुरंत बाद शरद पवार के दरबार में इस हाजिरी ने महायुति गठबंधन और राकांपा के दोनों धड़ों के बीच किसी बड़ी अंडरकरंट राजनीति की ओर इशारा कर दिया है।
गुवाहाटी से वापसी के सफर ने बयां की गठबंधन के भीतर की नई सियासी तस्वीर
नेताओं के बीच की यह आपसी दूरी केवल बंद कमरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि हाल ही में हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह के दौरान असम के गुवाहाटी में भी खुलकर सामने आ गई। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे तीनों ही नेता वहां पहुंचे हुए थे, लेकिन दिल्ली और राज्य की राजनीति में भूचाल तब आया जब समारोह की समाप्ति के बाद सुनेत्रा पवार ने अपनी ही पार्टी के इन दोनों वरिष्ठ सहयोगियों के साथ वापस लौटने के बजाय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ विशेष विमान से यात्रा करना बेहतर समझा, जिसने पार्टी के भीतर अविश्वास की खाई को जगजाहिर कर दिया।
भारतीय जनता पार्टी में विलय की अटकलें और रोहित पवार का बड़ा दावा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शरद पवार गुट के युवा नेता रोहित पवार के एक बेहद सनसनीखेज बयान ने सूबे के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह बड़ा दावा किया है कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे अपनी उपेक्षा से तंग आकर बहुत जल्द अपने वफादार विधायकों के एक बड़े समूह के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में राकांपा के ये दोनों खेमे अपनी साख बचाने के लिए क्या नया दांव खेलते हैं, क्योंकि इस शह और मात के खेल पर पूरे महाराष्ट्र की जनता की नजरें टिकी हुई हैं।
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