एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा बूस्टर डोज
भोपाल। ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस) पहली बार भोपाल में हो रहा है। इसे लेकर मोहन सरकार तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। इस मेगा इवेंट के जरिए मप्र की ब्रांडिंग की जाएगी। देश-दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज निवेशकों के सामने मप्र में संभावित संभावनाओं की झलक दिखलाई जाएगी। भोपाल में 24 और 25 फरवरी को आयोजित जीआईएसमें पहली बार सेक्टर वाइस समिट होंगी। इस समिट से एमएसएमई सेक्टर को बस्टर डोज मिलने की संभावना है। मप्र की अद्वितीय भौगोलिक स्थिति, समृद्ध प्राकृतिक संसाधन, विकसित बुनियादी ढांचा और उद्योग-अनुकूल नीतियां इसे निवेश के लिए देश का सबसे आकर्षक डेस्टिनेशन बनाती हैं। शहरी विकास, पर्यटन, माइनिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी और एमएसएमई, ये सभी क्षेत्र अपनी असीमित संभावनाओं और अनुकूल वातावरण से निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। मप्र खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यह देश में डायमंड, लाइमस्टोन, बॉक्साइट, कोयला, मैंगनीज और तांबे का प्रमुख उत्पादक है। पन्ना स्थित एशिया की एकमात्र डायमंड माइंस और विशाल कोयला भंडार राज्य को माइनिंग इंडस्ट्री के लिए एक आदर्श डेस्टिनेशन बनाते हैं। जीआईएस में माइनिंग समिट से खनन आधारित उद्योगों, मूल्यवर्धित प्र-संस्करण और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा होगी।
प्रदेश में 12.50 लाख एमएसएमई इकाइयां
राजधानी में 24-25 फरवरी को होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को बूस्ट मिलेगा। इससे बड़ी संख्या में रोजगार भी सृजन होने की उमीदें हैं। एमएसएमई ने भी इसकी तैयारी में लैंडबैंक बढ़ाते हुए 14 पिछड़े जिलों में नए औद्योगिक पार्क विकसित करने की तैयारी है। अभी प्रदेश में 12.50 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं। इनमें 66 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। जीआईएस में देश के बड़े उद्योगपतियों के साथ विदेशों के भी निवेशक शामिल होंगे। हाल ही में मुयमंत्री डॉ मोहन यादव ने जापान की यात्रा की। वहां के निवेशकों ने अपने मौजूदा उद्यमों का विस्तार करने की बात कही है। इसके पहले सीएम की ब्रिटेन और जर्मनी यात्रा के दौरान भी वहां की कंपनियों ने निवेश में रुचि दिखाई थी। यह तीनों देश जीआइएस में सहभागी रहेंगे। यदि एक बड़ा उद्योग लगेगा तो उसकी सहयोगी करीब 20 यूनिट शुरू होंगी। जैसे भोपाल में भेल की स्थापना के बाद गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में अधिकांश उसकी सहायक इकाइयां स्थापित की गई हैं। इसी प्रकार पीथमपुर में आयसर की सहायक यूनिट्स भी स्थापित की गई। सरकार का टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना पर भी काफी जोर है। उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार के अनुसार एमएसएमई की इकाइयों में बड़े उद्योगों की तुलना में चार से पांच गुना अधिक रोजगार मिलता है।
पूरे प्रदेश में लैंडबैंक तैयार
अधिकारियों के अनुसार जीआईएस में एमएसएमई की अलग समिट का आयोजन किया जा रहा है। इसे देखते हुए पूरे प्रदेश में लैंडबैंक तैयार किया जा रहा है। खासतौर पर औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े जिलों में नए औद्योगिक पार्क बनाए जा रहे हैं। निवाड़ी, टीकमगढ़, मऊगंज, सतना, आगरमालवा, सीहोर, खरगोन, बैतूल, सागर, बालाघाट, उज्जैन, रीवा, धार, कटनी जिलों में औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इन पार्कों में उद्योग शुरू होने से यहां विकास हो सकेगा। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य के प्रमुख 6 सेक्टर्स पर केंद्रित समिट के आयोजन की महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। यह पहली बार होगा जब हर सेक्टर के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और निवेशक एक मंच पर आकर विशेषज्ञ चर्चाओं, अवसरों और नीतिगत सुधारों पर संवाद करेंगे। इसमें सरकार की कोशिश है कि शहरी विकास, टूरिज्म, खनन, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी, और एमएसएमई में अधिक से अधिक निवेश हो। साथ ही सरकार मध्य प्रदेश के उन प्रवासियों को भी एमपी में निवेश के लिए प्रेरित करेगी, जो अन्य जगहों पर जाकर बस गए हैं। सीएम ने अपने जापान दौरे के दौरान इसके संकेत भी दिए थे, वहां उन्होंने मध्य प्रदेश के लोगों से मुलाकात की थी।
एमएसएमई सेक्टर राज्य की आर्थिक रीढ़
मप्र का एमएसएमई सेक्टर राज्य की आर्थिक रीढ़ है, जहां लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कार्यरत हैं। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना, नए क्लस्टर और निर्यात प्रोत्साहन नीतियां इसे निवेश के लिए एक डेस्टिनेशन बना रही हैं। एमएसएमई समिट में उद्योगों को वित्तीय सहयोग, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और नए बाजारों तक पहुंच को लेकर चर्चा होगी। प्रवासी भारतीयों को प्रदेश के उद्योग, स्टार्ट-अप, पर्यटन, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है। यह समिट न केवल राज्य की आर्थिक प्रगति में प्रवासी भारतीयों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा, बल्कि मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीय समिट का उद्देश्य विश्वभर में बसे मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को एक मंच पर लाना और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ ही मध्यप्रदेश के विकास में प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। साथ ही समिट मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जुडऩे का महत्वपूर्ण अवसर भी मिलेगा। इन विभागीय समिट से सरकार मध्यप्रदेश में निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। जीआईएस के इस नए स्वरूप से न केवल उद्योग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे। मध्यप्रदेश अब सिर्फ निवेश का केंद्र नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक भविष्य का निर्माण करने वाला प्रमुख राज्य बन रहा है। मध्य प्रदेश सरकार की कोशिश है कि ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से कम से कम चार लाख करोड़ तक के निवेश प्रस्ताव आए। उद्योगपतियों को परेशानी ना हो और उन्हें लुभाने के लिए सरकार दनादन नई नीतियां ला रही है। ताकि बिना किसी परेशानी के उद्योगपति एमपी में अपने काम को आगे बढ़ाए। उसी का नतीजा रहा कि सीएम ने जापान से लौटते ही मध्य प्रदेश में सेमी कंडक्टर को लेकर नई पॉलिसी लाए। यह भारत में उभरता हुआ क्षेत्र है। इसमें निवेश की भी बड़ी संभावनाएं हैं। इससे पहले सात रीजनल इंडस्ट्री समिट से भी हजारों करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं। कुछ उद्योगों के लिए जमीन भी आवंटित कर दी गई है।
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