सीएम हेल्पलाइन के लिए मुसीबत बनी मातृ वंदना योजना
भोपाल । प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सीएम हेल्प लाइन के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। इस योजना का लाभ हितग्राहियों को नहीं मिलने की वजह से हर दिन दर्जनों की संख्या में शिकायतें आ रही हैं। हालत यह है कि इसकी अब तक 48409 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। यह शिकायतें अब शासन के साथ ही सरकार के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। इस योजना में 24 करोड़ 20 लाख 45 हजार रुपए का पेमेंट पंजीयन कराने वाली गर्भवती महिलाओं को नहीं किया गया है। जबकि कई मामलों में महिलाओं ने बच्चों को जन्म दे दिया है और बच्चे दो से तीन साल तक की उम्र के हो चुके हैं। इसके बाद भी उन्हें भुगतान नहीं मिल सका है। इससे योजना को लेकर विरोध की स्थिति बन गई है और भुगतान नहीं किए जाने की शिकायतें लगातार बढ़ती ही जा रहीं हंै। एक जनवरी 2017 से शुरू की गई केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की बढ़ती शिकायतों के बाद अब सरकार ने इसके निराकरण पर फोकस किया है। मातृ वंदना योजना में पेंडेंसी के कारण होने वाली किरकिरी को देखते हुए अफसरों ने इसके मामले फिलहाल समाधान ऑनलाइन से हटवा दिए हैं। बताया जाता है कि, इस योजना में केंद्र सॉफ्टवेयर अपडेशन में गड़बड़ी के चलते लोगों को भुगतान नहीं हो रहा है।
सीएम हेल्पलाइन में ढाई माह से अटकीं 2.76 लाख शिकायतें: उधर, सीएम हेल्पलाइन और समाधान ऑनलाइन पोर्टल पर 100 दिन से अधिक अवधि की पेंडिंग शिकायतों का आंकड़ा 2 लाख 76 हजार 410 को पार कर गया है। लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव तथा कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर लंबित शिकायतों के निराकरण के लिए निर्देशित किया है। पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतों में आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं किए जाने, पक्षकारों पर समझौते, राजीनामा के लिए दबाव डालने के मामले भी शामिल हैं। नगर निगम, नगर परिषद और अन्य नगरीय निकायों की पीएम आवास योजना की किस्त भी हितग्राहियों को नहीं मिलने के मामले काफी अधिक हैं।
यह है योजना
इस योजना में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना का मकसद गर्भवती महिलाओं को आर्थिक मदद देना है। इस योजना में पहले बच्चे के जन्म पर 5000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह रकम दो किस्तों में दी जाती है, वहीं, दूसरे बच्चे (यदि लडक़ी हो) के जन्म पर 6000 रुपए की एक किस्त दी जाती है। योजना में गर्भावस्था के पंजीकरण के समय 1000 रुपए, छह महीने की गर्भावस्था के बाद कम से कम एक प्रसवपूर्व जांच कराने पर 2000 रुपए और बच्चे के जन्म के बाद और 14 सप्ताह के अंदर सार्वभौमिक टीकाकरण पूरा होने पर 2000 रुपए दिए जाने का प्रावधान है।
सीएम कर सकते हैं रिव्यू
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मामले में रिव्यू कर सकते हैं। यह रिव्यू समाधान ऑनलाइन के माध्यम से किया जाएगा। मुख्यमंत्री जापान यात्रा से लौटने के बाद वे सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ समाधान ऑनलाइन के माध्यम से बैठक कर पेंडिंग कम्प्लेंट्स की समीक्षा कर सकते हैं। इसके मद्देनजर सभी विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया गया है कि प्रकरणों के निराकरण के बाद सीएम हेल्पलाइन पोर्टल अपडेट जानकारी दर्ज करें।
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