कृषि मंत्री की छापेमारी के बाद सामने आया फर्जी खातों का बड़ा खेल
हनुमानगढ़: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़े पैमाने पर हुई कथित अनियमितताओं के विरुद्ध राजस्थान सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ी कानूनी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा पल्लू स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में की गई औचक छापेमारी के पश्चात पुलिस ने बैंक कर्मियों और अन्य संदिग्धों सहित कुल 165 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इस पूरे मामले में धोखाधड़ी, दस्तावेजों की जालसाजी और डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसने सरकारी योजनाओं में सेंधमारी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है।
करोड़ों के संदिग्ध क्लेम और फर्जीवाड़े का खुलासा
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि इस घोटाले के तार करोड़ों रुपये के संदिग्ध बीमा दावों और फर्जी तरीके से संचालित किए जा रहे किसान खातों से जुड़े हुए हैं। प्रारंभिक पड़ताल में यह पाया गया कि एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग कर कई बैंक खाते सक्रिय किए गए थे और समान दस्तावेजों के आधार पर अपात्र व्यक्तियों के नाम पर बीमा राशि जारी करवाई गई। डिजिटल बैंकिंग की खामियों का लाभ उठाकर जिस तरह से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है, उसने बैंकिंग सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर भी कई सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
कृषि मंत्री की छापेमारी और प्रशासनिक सक्रियता
लंबे समय से मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कृषि मंत्री ने स्वयं बैंक शाखा पहुंचकर रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की, जहाँ डिजिटल डेटा और भौतिक दस्तावेजों में भारी विसंगतियां पाई गईं। मंत्री की इस सक्रियता के बाद प्रशासन और पुलिस विभाग तुरंत हरकत में आया और उन सभी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की पहचान की गई जो योजना के नियमों के विरुद्ध थे। छापेमारी के दौरान जब्त किए गए संदिग्ध रिकॉर्ड अब इस कानूनी कार्रवाई का मुख्य आधार बन गए हैं, जिसके चलते पुलिस ने विस्तृत जांच का दायरा और अधिक बढ़ा दिया है।
डिजिटल ट्रांजैक्शन और संदिग्ध दस्तावेजों की सघन जांच
पुलिस और तकनीकी एजेंसियां अब कोर बैंकिंग सिस्टम के जरिए उन सभी खातों की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खंगाल रही हैं जिनके माध्यम से बीमा राशि का हस्तांतरण किया गया था। इस प्रक्रिया में शामिल बैंक कर्मचारियों, एजेंटों और बिचौलियों की पहचान की जा रही है तथा उनके द्वारा जमा कराए गए पहचान पत्रों और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान वास्तविक खेती क्षेत्र से कराया जा रहा है। जांच अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आएंगी, इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों के चेहरे भी बेनकाब होंगे और आरोपियों की संख्या में और अधिक वृद्धि होने की प्रबल संभावना है।
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