काया के बल पर करें धर्म का संचय: आचार्य महाश्रमण का प्रेरक उपदेश
शामलाजी: जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण बुधवार सुबह अरवल्ली जिले के मालपुर से विहार कर अणियोर कम्पा गांव पहुंचे। मार्ग में ग्रामीण महिलाओं ने आचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्राथमिक शाला परिसर में प्रवचन में आचार्य ने कहा कि जब तक शरीर सक्षम है, धर्म का आचरण कर लें। शास्त्र में बताया गया है कि जब तक बुढ़ापा पीड़ीत न करे, जब तक शरीर में कोई बीमारी न हो जाए और जब तक इन्द्रियां क्षीण न हो जाएं, तब तक मानव को धर्म का आचरण कर लेना चाहिए। जब तक शरीर की सक्षमता हो, तब तक धर्म का अच्छे रूप में आचरण कर लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धर्म का कार्य करने में तीन बाधाएं होती हैं। इनमें बुढ़ापा, बीमारी और इन्द्रिय शक्ति की हीनता है। पाप कर्म मानव जीवन रूपी नौका में छिद्र के समान होते हैं और इन छिद्रों के कारण नौका डूब जाती है। इसलिए आदमी को संसार रूपी समुद्र से तरने के लिए पाप कर्मों से बचने का प्रयास करना चाहिए। यह मानव जीवन मोक्ष प्राप्ति का गेट है।
आदमी को कम से कम अपने जीवन में लेनदेन में नैतिकता, प्रामाणिकता को रखने का प्रयास करना चाहिए। जितना संभव हो अहिंसा और नशामुक्ति की भावना को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए ताकि आत्मा परम सुख की ओर गति कर सके।
प्रवचन के बाद आचार्य ने ग्रामीणों को सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति की प्रेरणा प्रदान करते हुए इन्हें स्वीकार करने की अपील की। ग्रामीणों ने सहर्ष ही तीनों संकल्पों को स्वीकार किया और आचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया।
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