फडणवीस सरकार ने पुलिस बल को मजबूत करने के लिए उठाया बड़ा कदम
मुंबई: महाराष्ट्र के युवाओं के लिए खुशखबरी है। देवेंद्र फडणवीस कैबिनेट ने राज्य में 15000 पुलिसकर्मियों की भर्ती को मंगलवार को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह जानकारी दी। कैबिनेट ने सोलापुर-पुणे-मुंबई मार्ग के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएपीएफ) को भी मंजूरी दी। साथ ही कैबिनट ने सामाजिक न्याय विभाग के अलग-अलग सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की ओर से संचालित योजनाओं के तहत लोन के गारंटर के लिए मानदंडों में ढील दी।
महाराष्ट्र पुलिस फोर्स में 15 हजार की भर्ती
महाराष्ट्र पुलिस फोर्स में लगभग 15 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती के फैसले को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिल गई है। यह फैला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाले गृह मंत्रालय ने लिया। आइए जानते हैं आज हुई कैबिनेट मीटिंग में क्या-क्या फैसले लिए गए?
कैबिनेट में क्या फैसले लिए गए?
1. गृह विभाग
बैठक में महाराष्ट्र पुलिस फोर्स में लगभग 15 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती को मंजूरी देने का फैसला लिया गया।
2. खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग
राज्य में उचित मूल्य दुकानदारों का मार्जिन बढ़ा दिया गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन कार्ड धारकों को खाद्यान्न वितरित करने का फ़ैसला लिया गया है।
3. विमानन विभाग
सोलापुर-पुणे-मुंबई हवाई यात्रा के लिए व्यवहार्यता अंतर निधि (वीजीएफ़) प्रदान करने का फैसला लिया गया है।
4. सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग
सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले निगमों द्वारा क्रियान्वित विभिन्न ऋण योजनाओं में गारंटर की शर्तों में ढील दी गई है। सरकारी गारंटी को पांच साल के लिए बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
अनधिकृत निर्माण पर जुर्माना माफ
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अवैध निर्माणों के कारण चर्चा में रहने वाले ठाणे नगर निगम क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण पर जुर्माना माफ करने का फैसला किया है। नगर विकास विभाग ने सोमवार को इस संबंध में एक सरकारी फैसला लिया। बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नगर निगम चुनावों से पहले नगर विकास विभाग के माध्यम से अवैध निर्माणों पर करोड़ों रुपये का जुर्माना माफ करके अपने गढ़ में वोटों की बारिश की है।
कब से बकाया था जुर्माना?
ठाणे नगर निगम क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर लगाया गया जुर्माना 2009 से बकाया था। इसके अलावा, लगाए गए जुर्माने की राशि मूल कर से अधिक थी। इस वजह से, संपत्ति मालिकों द्वारा जुर्माना नहीं भरा जा रहा था। इसका असर ठाणे नगर निगम को करों के रूप में मिलने वाले राजस्व पर पड़ रहा था। पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम की तर्ज पर ठाणे नगर निगम क्षेत्र में भी जुर्माना माफ करने का फैसला मानसून सत्र के दौरान हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में लिया गया था, जिसका उद्देश्य अनधिकृत निर्माणों पर जुर्माना माफ करना था ताकि संपत्ति मालिक मूल कर का भुगतान करें।
इस निर्णय के अनुसार, महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम के अनुसार, ठाणे नगर निगम क्षेत्र में 31 मार्च, 2025 तक लगाए गए बकाया जुर्माने माफ कर दिए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने इसके लिए नियम और शर्तें निर्धारित की हैं। अवैध निर्माण वाले संपत्ति मालिकों को मूल कर का भुगतान करना होगा। तभी बकाया जुर्माना माफ किया जाएगा। अवैध निर्माण के जुर्माने माफ करने का मतलब यह नहीं होगा कि उक्त निर्माण नियमित हो गया है। सरकार के निर्णय में कहा गया है कि संबंधित नगर निगम जुर्माने की माफी के लिए राज्य सरकार से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता या मुआवजे की मांग नहीं कर सकता है।
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