बीकानेर में खत्म हुआ 'जल-वनवास', मरुधरा की प्यास बुझी
बीकानेर: राजस्थान के बीकानेर जिले में पिछले कई दिनों से जारी भीषण तपिश और पेयजल संकट से जूझ रहे लोगों के लिए आखिरकार एक बड़ी और राहत देने वाली खबर आई है। लंबे समय से जारी नहरबंदी की अवधि समाप्त होने के बाद गुरुवार को बीछवाल और शोभासर दोनों मुख्य जलाशयों में नहरी पानी की आमद हो गई है। पानी के पहुंचते ही अब शहर में पहले की तरह सामान्य और नियमित पेयजल आपूर्ति का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
दोपहर से लेकर शाम तक दोनों मुख्य जलाशयों में हुई पानी की एंट्री
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे सबसे पहले बीछवाल जलाशय में नहरी पानी की आवक दर्ज की गई। इसके बाद शाम लगभग 5:10 बजे शोभासर जलाशय में भी पानी पहुंच गया। जलाशयों में पानी की एंट्री होते ही पिछले कई दिनों से तनाव झेल रहे जलदाय विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। इस मौके पर परंपरा के अनुसार पानी की विधिवत पूजा-अर्चना कर स्वागत किया गया।
लैब टेस्ट में पास हुआ पानी, पीने के लिए पूरी तरह सुरक्षित
जलदाय विभाग के तकनीकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जलाशयों में पहुंचे इस नए पानी की शुद्धता और गुणवत्ता की गहन जांच (लैब टेस्टिंग) की गई है। जांच रिपोर्ट में पानी के सभी मानक सही पाए गए हैं और यह पूरी तरह से शुद्ध व पीने योग्य है। विभाग के अनुसार, इस जांच के बाद अब बिना किसी देरी के शहर के सभी हिस्सों में सुचारू रूप से पानी की सप्लाई बहाल की जा रही है।
'ऑड-ईवन' सप्लाई से मिली मुक्ति, जल संकट का हुआ अंत
गौरतलब है कि बीते कई दिनों से जारी नहरबंदी के कारण बीकानेर शहर में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई थी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि जलदाय विभाग को मजबूरन शहर के विभिन्न वार्डों और मोहल्लों में 'ऑड-ईवन' फॉर्मूले (एक दिन छोड़कर एक दिन) के तहत पानी की कटौती करके सप्लाई करनी पड़ रही थी। तेज गर्मी के बीच इस व्यवस्था से आम जनता बेहद परेशान थी, लेकिन अब नहरी पानी के दोबारा आ जाने से इस संकट का पूरी तरह खात्मा हो गया है।
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