अब रोज़मर्रा का हिस्सा बन चुका है बाहर खाना, टियर-2 शहरों में खुलेंगे नए रेस्तरां
व्यापार: युवा पीढ़ी के लिए अब बाहर खाना कभी-कभार की बात नहीं रह गई है। यह एक जीवनशैली के रूप में बदल रहा है। इसलिए, टियर-2 शहरों में होटलों की वृद्धि होने की उम्मीद है। ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेशन जेड यानी 1995 से 2012 के बीच पैदा युवा इस समय तेजी से होटलों और रेस्तरां का रुख कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ता उपभोक्ता खर्च, अनुकूल लागत संरचना और बेहतर बुनियादी ढांचा टियर-2 शहरों को महानगरों का एक आकर्षक विकल्प बना रहे हैं। जेनरेशन जेड और मिलेनियल्स उपभोक्ता आधार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके लिए होटल रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा बन गया है। औसत मासिक आय महानगरों के स्तर के करीब पहुंचने के साथ ग्राहक नए व्यंजनों और स्वरूपों के साथ प्रयोग कर रहे हैं। 72 फीसदी से ज्यादा उपभोक्ता विदेशी व्यंजनों को पसंद करते हैं।
प्रयागराज, वाराणसी, शिर्डी जैसे शहर में बढ़ रहे ब्रांड
प्रयागराज, वाराणसी, पुरी और शिर्डी जैसे शहरों में न केवल श्रद्धालुओं की, बल्कि निवेशकों और आतिथ्य ब्रांडों की भी संख्या बढ़ रही है। ये शहर विश्वसनीय अनुभवों की जरूरत को पूरा कर रहे हैं। 94 फीसदी होटल और रेस्तरां मालिकों ने टियर-2 और टियर-3 बाजारों में विस्तार करने की योजना बनाई है। इससे पता चलता है कि भारत के रेस्तरां क्षेत्र के लिए विकास की अगली लहर महानगरों से आगे बढ़ रही है।
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