अजमेर: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की वर्ष 2022 की हिंदी स्कूल व्याख्याता भर्ती में फर्जी डिग्री से जुड़े चर्चित मामले में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक सुशील कुमार शर्मा ने सोमवार को अपर जिला एवं सेशन न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है। आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका अदालत से पहले ही खारिज हो चुकी थी, जिसके बाद उसने न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए सरेंडर किया।

फर्जी एमए डिग्रियों के जरिए ऑनलाइन आवेदन का आरोप

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ निवासी सुशील कुमार शर्मा के खिलाफ आरपीएससी के वरिष्ठ उप सचिव अजय सिंह चौहान ने अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज कराया था। इस मामले के अनुसार, वर्ष 2022 की हिंदी स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा में दो अभ्यर्थियों ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार (चित्तौड़गढ़) की कथित फर्जी एमए डिग्रियों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन किया था।

दस्तावेज सत्यापन के दौरान खुली पोल और एसओजी को सौंपी जांच

15 अक्टूबर 2022 को आयोजित परीक्षा में सांचौर क्षेत्र की ब्रह्माकुमारी और कमला कुमारी सफल घोषित हुई थीं। इसके बाद 14 जून 2023 को परिणाम आने पर जब दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई, तो डिग्रियों पर संदेह जताया गया। पुलिस ने दोनों अभ्यर्थियों को हिरासत में ले लिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच एसओजी (SOG) को सौंप दी गई।

मामले में अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

अदालत में आरोपी सुशील कुमार शर्मा के सरेंडर की जानकारी मिलते ही एसओजी की टीम ने न्यायालय पहुंचकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस पूरे फर्जी डिग्री प्रकरण में पुलिस और एसओजी द्वारा अब तक 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले के अन्य पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है।