कलम और कर्म का संगम, डिलीवरी बॉय को मिला साहित्यिक पुरस्कार
बीजिंग: चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग ने एक अनूठी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें चीन के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक 'लू शुन साहित्य पुरस्कार' से नवाजा गया है। उन्हें यह सम्मान उनके बहुचर्चित कविता संग्रह 'लो फ्लाइट' के लिए प्रदान किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस किताब की अधिकांश कविताएं उन्होंने डिलीवरी के दौरान मिलने वाले चंद खाली लम्हों में कागज़ के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं।
डिलीवरी राइडर से मशहूर कवि तक का सफर
वर्ष 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले वांग जिबिंग की रचनाएं धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय होने लगीं। डिलीवरी के काम की आपाधापी के बीच भी उन्होंने अपनी रचनात्मकता को जीवित रखा। उनके द्वारा लिखे गए छोटे-छोटे काव्य अंशों ने आम जनता के दिलों को छुआ, जिससे उन्हें एक पहचान मिली और वे एक लोकप्रिय कवि के रूप में उभरकर सामने आए।
200 राइडर्स के संघर्ष और अनुभवों की गाथा
वर्ष 2024 में प्रकाशित हुई उनकी नई किताब 'लो फ्लाइट' मुख्य रूप से डिलीवरी बॉयज़ की दैनिक चुनौतियों, अनवरत संघर्ष और उनके जीवन के कड़वे यथार्थ पर आधारित है। इस संग्रह को तैयार करने के लिए वांग जिबिंग ने लगभग 200 सह-डिलीवरी राइडर्स से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनके वास्तविक अनुभवों तथा पीड़ा को अपनी कविताओं के माध्यम से पन्नों पर उकेरा, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च साहित्यिक सराहना मिली है।
निर्माणाधीन सुरंग हादसे से मचा हड़कंप, 10 मजदूरों की गई जान
कांग्रेस के प्रदर्शन पर पुलिस का एक्शन, राहुल-अखिलेश समेत कई नेता हिरासत में
मणिपुर में बदलते हालात, KCP के 46 कैडरों के आत्मसमर्पण से शांति प्रक्रिया को मिली मजबूती
मध्य प्रदेश में UCC को मिली मंजूरी, विधानसभा से विधेयक पास; आम लोगों की जिंदगी कितनी होगी आसान?
राजस्थान के मरीजों को बड़ी राहत, अब देशभर में मिलेगा 25 लाख तक कैशलेस इलाज
जयपुर में शहरी सेवा शिविरों का फॉलोअप शुरू, 31 अगस्त तक लंबित मामलों का होगा निस्तारण
सरकार का एक्शन: Vedanta पर अरबों रुपये की देनदारी का मामला, DGH ने भेजा नोटिस
मध्य प्रदेश विधानसभा ने UCC बिल किया पारित, समान नागरिक संहिता की ओर बड़ा कदम
पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, प्रधान-शाह और मोदी के इस्तीफे की मांग