7 या 8 जुलाई, कब मनाई जाएगी कालाष्टमी? उज्जैन के आचार्य से जानें सही तिथि और अचूक उपाय
हिंदू धर्म में हर तिथि और वार का अपना अलग धार्मिक महत्व माना गया है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण तिथि कालाष्टमी है, जो हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. यह दिन भगवान शिव के रौद्र और रक्षक स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा व्यक्ति को भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की परेशानियों से सुरक्षा प्रदान करती है. उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, कालाष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का विशेष अवसर भी है. इस बार तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, ऐसे में जानिए सही तिथि और विशेष उपाय.
वैदिक पंचांग के अनुसार, भगवान भैरव की कृपा बरसाने वाली आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि 7 जुलाई 2026 को दोपहर 01 बजकर 24 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 08 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजकर 21 बजे समाप्त होगी. ऐसे में कालाष्टमी व्रत की पूजा 7 जुलाई 2026, दिन मंगलवार को की जाएगी. हिंदू मान्यता के अनुसार, जो कालाष्टमी मंगलवार और रविवार के दिन पड़ती है, उसका धार्मिक महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है.
उज्जैन में कालाष्टमी पर विशेष उत्सव
धार्मिक नगरी उज्जैन में कालाष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. क्षिप्रा नदी के किनारे भैरवगढ़ क्षेत्र में स्थित काल भैरव मंदिर इसकी सबसे बड़ी पहचान है. इस मंदिर की अनोखी विशेषता यह है कि यहां भगवान काल भैरव को शराब का भोग लगाया जाता है, जिसे वह स्वयं ग्रहण करते हैं. पुजारी द्वारा लगाए गए शराब के प्याले का कुछ ही क्षणों में खाली हो जाना श्रद्धालुओं के लिए चमत्कार से कम नहीं होता. कालाष्टमी पर यहां विशेष श्रृंगार और जन्मोत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है.
कालाष्टमी पर जरूर करें ये उपाय
1. यदि लगातार प्रयासों के बावजूद जीवन में अभाव और परेशानियां बनी हुई हैं, तो कालाष्टमी पर काल भैरव के चरणों में काला धागा अर्पित कर कुछ समय ध्यान करें और फिर उसे अपने दाएं पैर में धारण करें. वहीं स्वास्थ्य लाभ और कष्टों से मुक्ति के लिए काले कुत्ते को सरसों तेल लगी रोटी खिलाना शुभ माना जाता है.
2. धन और सुख-साधनों में वृद्धि के लिए मिट्टी के दीपक में सरसों के तेल का दीपक जलाकर मंत्र जाप करें. यह मंत्र है- ‘ऊं ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊं’. अगर पारिवारिक जीवन में तनाव है, तो स्नान के बाद भगवान शिव के सामने बैठकर शिव चालीसा का पाठ करें.
काल भैरव उपासना से मिलती है मानसिक शांति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई काल भैरव की उपासना आर्थिक बाधाओं को दूर करने में सहायक मानी जाती है. साथ ही इससे घर-परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक वातावरण का संचार होता है. इसी वजह से देशभर से श्रद्धालु इस अवसर पर काल भैरव के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं.
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