राजस्थान रोडवेज की नई ट्रांसफर पॉलिसी, अंगदान करने वालों को मिलेगा बड़ा लाभ
जयपुर: राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) के हजारों कर्मचारियों का अपनी मनपसंद जगह पर तबादला कराने का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। रोडवेज बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक में हरी झंडी मिलने के बाद प्रबंधन ने प्रदेश में नई और ऐतिहासिक 'ट्रांसफर पॉलिसी' को पूरी तरह धरातल पर उतार दिया है। गौरतलब है कि इस संवेदनशील नीति के आधिकारिक आदेश पूर्व में 4 फरवरी 2026 को ही जारी कर दिए गए थे, जिसे अब प्रशासनिक रूप से पूरी तरह लागू कर दिया गया है। रोडवेज प्रशासन द्वारा तैयार की गई इस नई तबादला नीति की सबसे खास बात यह है कि इसमें जहां एक तरफ सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े नियम शामिल किए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ मानवीय मूल्यों और सामाजिक सरोकार से जुड़े संवेदनशील पहलुओं को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है।
सिफारिशों और बार-बार होने वाले फेरबदल पर लगा कड़ा अंकुश
रोडवेज प्रबंधन ने इस नई नीति के जरिए ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने का प्रयास किया है, ताकि बेवजह के राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप को रोका जा सके। नए नियमों के तहत अब यदि किसी भी रोडवेज कर्मचारी का एक बार किसी डिपो या स्थान से ट्रांसफर कर दिया जाता है, तो आगामी दो वर्षों की समयावधि पूरी होने से पहले उसे दोबारा उसी पुरानी जगह पर किसी भी सूरत में तैनात नहीं किया जा सकेगा। विभाग के इस कड़े कदम से बार-बार होने वाले तबादलों पर पूरी तरह लगाम लगेगी और कर्मचारियों को भी एक स्थान पर रहकर अपना काम बेहतर तरीके से करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।
अंगदान करने वाले जांबाजों और गंभीर मरीजों के लिए विशेष कवच
इस नई नीति में सामाजिक जिम्मेदारी और अंगदान जैसी जीवन रक्षक मुहिम को बढ़ावा देने के लिए एक बेहद सराहनीय और अनूठा फैसला लिया गया है। रोडवेज का कोई भी ऐसा कर्मचारी जिसने समाज हित में अपनी किडनी या लीवर का कोई हिस्सा दान किया है, उसे अंगदान करने की तारीख से अगले तीन सालों तक अपनी पसंद के किसी भी स्टेशन या डिपो में पोस्टिंग के लिए सबसे पहली प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही कैंसर, किडनी फेल्योर जैसी गंभीर और असाध्य बीमारियों से जूझ रहे पीड़ित कर्मचारियों को भी इस नीति के तहत विशेष वरीयता सूची में रखा गया है, ताकि उन्हें इलाज की सहूलियत के हिसाब से सबसे पहले राहत पहुंचाई जा सके।
बिखरे हुए परिवारों को जोड़ने और दिव्यांगों को गृह जिला देने की अनूठी पहल
रोडवेज प्रशासन ने विशेष और संवेदनशील श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के दर्द को समझते हुए उन्हें अपने गृह जिले या सुविधाजनक स्थानों पर नियुक्ति देने का मार्ग प्रशस्त किया है। नई नीति के अनुसार दिव्यांगजन, विधवा महिलाओं, एकल महिलाओं, परित्यक्ताओं और विधुर पुरुष कर्मचारियों को उनकी सुविधानुसार तैनाती देने में पूरा सहयोग किया जाएगा। इसके अलावा एक ही सेवा या अलग-अलग सरकारी विभागों में कार्यरत होने के कारण लंबे समय से अलग-अलग जिलों में नौकरी कर रहे पति-पत्नी को भी इस बार बड़ी राहत दी गई है, जिससे वे एक ही जिले या आसपास के क्षेत्र में रहकर अपने परिवार की देखभाल कर सकेंगे।
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