इबोला संक्रमण को लेकर चिंता बरकरार, जानिए WHO का ताजा बयान और भारत की रणनीति
इबोला वायरस का लगातार पैर पसारता मौजूदा प्रकोप इस समय वैश्विक स्तर पर चिकित्सा वैज्ञानिकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गहरी चिंता और चुनौती का विषय बना हुआ है। आधिकारिक तौर पर 15 मई 2026 को घोषित किए गए इस वायरस के ताजा आउटब्रेक से वर्तमान में 'डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो' (DRC) सबसे भीषण तरीके से प्रभावित है। हालांकि, दुनिया के कई अन्य महाद्वीपों और देशों में भी इसका खौफ और संभावित संक्रमण का खतरा तेजी से मंडरा रहा है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में इबोला के पुष्ट (कन्फर्म) मामलों की संख्या बढ़कर 1,155 तक पहुंच गई है, जिनमें से अब तक 304 मरीजों की मौत हो चुकी है और करीब 385 संक्रमितों को कड़े आइसोलेशन वार्डों में रखकर उपचार दिया जा रहा है। कांगो के पड़ोसी देश यूगांडा में भी यह संक्रमण फैल चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस एडनोम घेब्येयियस ने हालांकि वैश्विक स्तर पर इसके तात्कालिक जोखिम को फिलहाल कम बताया है, लेकिन इसके बढ़ते कम्युनिटी ट्रांसमिशन को देखते हुए भारत समेत दुनिया के कई विकसित देश पूरी तरह सतर्क हो गए हैं।
यूरोप में इबोला की दस्तक: फ्रांस में मिला पहला केस, 21 दिनों का कड़ा क्वारंटाइन नियम लागू
इबोला वायरस अब अफ्रीकी महाद्वीप की सीमाओं को लांघकर यूरोप तक पहुंच चुका है, जिससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। कांगो में चिकित्सा सेवाएं देकर फ्रांस लौटे एक फ्रांसीसी डॉक्टर में इबोला वायरस के संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि हुई है। अफ्रीकी देशों से बाहर रिपोर्ट किया गया यह इस घातक रक्तस्रावी बुखार (Hemorrhagic Fever) का पहला मामला है।
चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान (फ्लाइट) के दौरान ही डॉक्टर की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी, जबकि प्लेन में सवार होते समय उनमें बीमारी का कोई भी बाहरी लक्षण परिलक्षित नहीं हो रहा था। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए एक देश से दूसरे देश में वायरस के तेजी से फैलने की नई चिंताओं को जन्म दे दिया है। इसके मद्देनजर फ्रांस सरकार ने कड़े प्रतिबंध लागू करते हुए प्रावधान किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी पुष्ट या संदिग्ध इबोला मरीज के प्रत्यक्ष संपर्क में आया है, तो उसे अनिवार्य रूप से 21 दिनों तक सक्रिय स्वास्थ्य निगरानी (एक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग) और सख्त क्वारंटाइन से गुजरना होगा।
भारत में इबोला का जोखिम: केरल में संदिग्ध मामला आने के बाद बढ़ी चौकसी
विभिन्न देशों के बीच लगातार जारी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और आवाजाही के मद्देनजर भारत सरकार भी इस संक्रामक बीमारी के खतरे को लेकर बेहद गंभीर है। राहत की बात यह है कि वर्तमान में भारत के भीतर इबोला का एक भी पुष्ट (कन्फर्म) मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, सतर्कता के तौर पर विदेश से आने वाले सभी मुसाफिरों की देश के मुख्य हवाई अड्डों पर गहन मेडिकल जांच और थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। संभावित लक्षणों वाले संदिग्धों के लिए हवाई अड्डों के समीप ही अत्याधुनिक आइसोलेशन सेंटर्स की व्यवस्था की गई है।
हाल ही में, दक्षिण सूडान से यात्रा कर वापस लौटी एक महिला में इबोला जैसे संदिग्ध लक्षण दिखने के बाद उन्हें एहतियातन केरल के कोट्टायम मेडिकल कॉलेज के विशेष आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था। देश में कम्युनिटी ट्रांसमिशन के खतरे और यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा बच्चों की सेहत को लेकर जारी की गई चेतावनी के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पल-पल की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
संक्रमण की रोकथाम के लिए 'एयर सुविधा 2.0' डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत
मध्य अफ्रीका में फैले इस प्रकोप को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 'ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी' घोषित किए जाने के तुरंत बाद, भारत के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने संयुक्त रूप से एक बड़ा कदम उठाया है। देश के सभी हवाई अड्डों पर विदेशी यात्रियों की निगरानी को डिजिटल और अभेद्य बनाने के उद्देश्य से 'एयर सुविधा 2.0' (Air Suvidha 2.0) नामक पोर्टल को 25 जून को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया गया है।
इस पूरी तरह से संपर्क रहित (कॉन्टैक्टलेस) डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमों के तहत, अब किसी भी देश से भारत आने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अपनी यात्रा शुरू करने से पहले ऑनलाइन माध्यम से 'हेल्थ सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म' भरना अनिवार्य होगा। यह नियम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और खाड़ी देशों से आने वाले उन लाखों भारतीय प्रवासियों पर भी कड़ाई से लागू होगा, जहां से भारतीय महानगरों के लिए रोजाना दर्जनों सीधी उड़ानें संचालित होती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों और हवाई अड्डे के ग्राउंड स्टाफ दोनों को सुरक्षित रखना है।
दुर्लभ ‘बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने में जुटे ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिक
वैश्विक स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण सूडान, कांगो और युगांडा की सीमाओं से सटे क्षेत्रों को इबोला के प्रसार के लिहाज से 'हाई-रिस्क जोन' (अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र) के रूप में चिह्नित किया गया है। डब्ल्यूएचओ के वरिष्ठ अधिकारी अब्दिरहमान महामुद ने बताया कि वैश्विक स्तर पर अब दूरदराज के समुदाय भी इस वायरस के खतरों के प्रति जागरूक हो रहे हैं और सुरक्षात्मक किट व दवाओं की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में कांगो का 'इतुरी' शहर इस संक्रमण का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है।
राहत की बात यह है कि इस जानलेवा और दुर्लभ ‘बुंडीबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन से निपटने के लिए ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शीर्ष वैज्ञानिक दिन-रात एक कर नई वैक्सीन (टीका) विकसित करने के अंतिम चरण में जुटे हैं। हालांकि, इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने के लिए इस वैक्सीन को पूरी तरह तैयार होने में अभी कम से कम एक महीने या उससे अधिक का समय लग सकता है। तब तक केवल कड़े सुरक्षात्मक उपाय और हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग ही इस वायरस को रोकने का एकमात्र कारगर हथियार हैं।
अवैध लकड़ी परिवहन पर वन विकास निगम की बड़ी कार्रवाई
मल्हार में खुली छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की नई शाखा
विश्व कप के रण में मध्यप्रदेश का गौरव: हॉकी इंडिया की विश्व कप टीम में हॉकी अकादमी के एसोसिएट खिलाड़ी विवेक सागर प्रसाद का चयन
मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई
स्वस्थ पशुधन, समृद्ध किसान: मुंगेली में 582 शिविरों से बदली पशुपालन की तस्वीर
बालोद में असर दिखा रही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
प्रत्येक विधानसभा में खुलेगी "कृषि यंत्र किराये की दुकान"
राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाना जागरूक नागरिक की पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव