बालोतरा: राजस्थान के बालोतरा जिले के समदड़ी इलाके में सात वर्ष पहले हुए सनसनीखेज साधु हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। बालोतरा सेशन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी ओमगिरी उर्फ ओमप्रकाश को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को उम्रकैद (आजीवन कठोर कारावास) की सजा सुनाई है। माननीय न्यायालय ने माना कि पुलिस द्वारा पेश किए गए वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य सबूत इतने मजबूत थे कि उनके आधार पर आरोपी का दोष पूरी तरह सिद्ध होता है।

खेत में मिला था पैरों कटा हुआ क्षत-विक्षत शव

यह खौफनाक वारदात 16 फरवरी 2019 को सामने आई थी। समदड़ी थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि सुरपुरा गांव में स्थित धजाजाल बालाजी मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर एक सुनसान खेत में एक शव पड़ा हुआ है। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जब तफ्तीश की, तो मृतक की पहचान देवेंद्रगिरी उर्फ जोगसिंह के रूप में हुई। शव कई दिन पुराना होने के कारण क्षत-विक्षत हो चुका था। बेरहमी की हद यह थी कि मृतक के दोनों पैर जांघों से कटे हुए थे और सिर पर गहरे जख्म थे। मौके पर गाड़ी के टायर और शव को घसीटने के निशान मिलने के बाद पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया था।

शराब के नशे में हुआ था झगड़ा, बैसाखी और कुल्हाड़ी से दिया वारदात को अंजाम

पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई, वह बेहद चौंकाने वाली थी। मुख्य आरोपी ओमगिरी धजाजाल हनुमान मंदिर में पुजारी था और मृतक का भी वहां रोज उठना-बैठना था। घटना के दिन दोनों ने एक साथ बैठकर शराब पी थी, जिसके बाद किसी बात पर दोनों में हिंसक झड़प हो गई। आरोपी ओमगिरी दोनों पैरों से दिव्यांग था और बैसाखी के सहारे चलता था। उसने गुस्से में आकर अपनी बैसाखी से देवेंद्रगिरी के सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए जब उसे भारी गाड़ी में रखने में दिक्कत हुई, तो उसने कुल्हाड़ी से मृतक के दोनों पैर काट दिए और लाश को खेत में फेंक कर सबूत मिटाने की कोशिश की।

बिना किसी चश्मदीद के पुलिस ने बुना कड़ा कानूनी फंदा

इस पूरे मर्डर मिस्ट्री की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस जघन्य हत्याकांड का कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह (चश्मदीद) नहीं था। इसके बावजूद तत्कालीन थानाधिकारी भूटाराम के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वैज्ञानिक पद्धति का इस्तेमाल किया। पुलिस ने फॉरेंसिक (FSL) जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल के भौतिक साक्ष्यों और कड़ियों को जोड़कर एक ऐसी मजबूत साक्ष्य श्रृंखला (चैन ऑफ एविडेंस) तैयार की, जिससे आरोपी का बचना नामुमकिन हो गया। घटना के मात्र दो महीने के भीतर ही 18 अप्रैल 2019 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी।

केस ऑफिसर स्कीम के तहत प्रभावी पैरवी और सजा का ऐलान

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 'केस ऑफिसर स्कीम' में शामिल किया गया था, जिसकी निगरानी खुद बड़े अधिकारी कर रहे थे। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक नेमाराम चौधरी ने प्रभावी पैरवी की और कोर्ट के सामने 23 गवाह व 74 दस्तावेजी सबूत पेश किए।

न्यायालय का निर्णय: सत्र न्यायाधीश एम.आर. सुथार ने सभी वैज्ञानिक और दस्तावेजी सबूतों को विश्वसनीय मानते हुए दोषी ओमगिरी को धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास व ₹20,000 जुर्माना और धारा 201 (सबूत मिटाने) के तहत 5 साल की कठोर कैद व ₹5,000 जुर्माने की सजा सुनाई।

इस ऐतिहासिक फैसले पर बालोतरा के पुलिस अधीक्षक रमेश ने कहा कि यह निर्णय साफ संदेश देता है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, यदि पुलिस की जांच वैज्ञानिक और साक्ष्य अचूक हों, तो कानून के शिकंजे से कोई बच नहीं सकता।