शिवसेना में फिर हलचल, 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने पर नितेश राणे का बयान
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। इस बड़े घटनाक्रम पर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा (BJP) के कद्दावर नेता नितेश राणे ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पाला बदलने वाले सभी सांसदों के इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा कि इन नेताओं ने आखिरकार 'हिंदुत्व' के सही मार्ग को चुना है। गौरतलब है कि उद्धव गुट के इन छह सांसदों ने एक दिन पहले ही औपचारिक रूप से शिंदे गुट का दामन थामा था।
इन बड़े चेहरों ने छोड़ा उद्धव ठाकरे का साथ
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरों में संजय उत्तमराव देशमुख, संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल और नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर के नाम शामिल हैं। इन दिग्गज नेताओं के अचानक पार्टी छोड़ने से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। इस टूट से उद्धव गुट के उस दावे को भी भारी नुकसान पहुँच रहा है जिसमें वे खुद को 'असली शिवसेना' बताते रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का पक्ष अब और मजबूत होता दिख रहा है।
उद्धव गुट की नीतियों पर साधा तीखा निशाना
मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा नेता नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे की राजनीतिक नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। राणे ने विवादित बयान देते हुए कहा कि इन सांसदों को अब यह पूरी तरह से महसूस हो चुका था कि उद्धव ठाकरे की विचारधारा में कितना बदलाव आ चुका है, इसलिए उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी को छोड़कर राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की राह पर आगे बढ़ने का फैसला किया।
UCC पर दो टूक: 'देश में शरिया नहीं, संविधान चलेगा'
इस दौरान नितेश राणे ने देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने का भी पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने विरोधियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "जो लोग बाबासाहेब के बनाए हमारे देश के संविधान का सम्मान करते हैं, वे यूसीसी का विरोध भला कैसे कर सकते हैं? क्योंकि संविधान में खुद इसका जिक्र है। यदि कोई हमारे संविधान को मानता है, तो उसे इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।"
राणे ने आगे सख्त लहजे में कहा, "जिन लोगों को देश के कानून से ऊपर शरिया कानून चाहिए, उन्हें ऐसे देशों का रुख कर लेना चाहिए जहाँ यह लागू है। भारत में शरिया कानून के लिए कोई जगह नहीं है; यहाँ सिर्फ हमारे संविधान में लिखी बातें ही लागू की जाएँगी।" भाजपा नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई बड़े राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर बहस बेहद तेज हो चुकी है और कुछ राज्य इसे लागू भी कर चुके हैं।
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