क्रिप्टोकरेंसी के जरिए गैंग तक पहुंचता था पैसा, गोदारा गैंग का भंडाफोड़
बीकानेर। डिजिटल अपराध और संगठित माफिया तंत्र के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में स्थानीय पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। साइबर थाना पुलिस ने दो ऐसे शातिर युवकों को दबोचा है, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए कमाए गए काले धन को कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा गिरोह तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि ठगी की इस रकम को ठिकाने लगाने के लिए हवाला और क्रिप्टोकरेंसी जैसे अवैध रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए होता था पैसों का ट्रांसफर
पकड़े गए आरोपी देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे ऑनलाइन ठगों के लगातार संपर्क में थे। ठगी की शिकार जनता से वसूली गई रकम को सबसे पहले फर्जी या डमी बैंक खातों में जमा कराया जाता था। इसके बाद, तकनीकी हेरफेर करते हुए उस पैसे को डिजिटल करेंसी (क्रिप्टो) में बदला जाता था, ताकि कानून की नजरों से बचकर इसे गैंग के मुख्य गुर्गों तक भेजा जा सके। जांच टीम को इस पूरे खेल में हवाला कारोबारियों के शामिल होने के भी पुख्ता सबूत मिले हैं।
रामपुरा बस्ती से दबोचे गए दो शातिर गुर्गे
पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए रामपुरा बस्ती के रहने वाले संदीप स्वामी और मुकेश बिश्नोई को अपनी कस्टडी में लिया है। पकड़े गए दोनों आरोपियों से की गई गहन पूछताछ में कई चौंकाने वाले राज उगले हैं। इन जानकारियों के बाद सुरक्षा और जांच एजेंसियां अब इस पूरे सिंडिकेट की आखिरी कड़ी तक पहुंचने के लिए जाल बिछा रही हैं।
देशभर में दर्ज हैं शिकायतें, 50 लाख के संदिग्ध ट्रांजैक्शन
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए युवकों के बैंक खातों की जब बारीकी से जांच की गई, तो देश के कई राज्यों में इनके खिलाफ ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतें लिंक पाई गईं। शुरुआती दौर की अकाउंट ऑडिटिंग में करीब 50 लाख रुपये के संदिग्ध और अवैध लेन-देन की बात प्रमाणित हो चुकी है, जिसकी संख्या आगे और बढ़ सकती है।
हथियारों की खरीद और रंगदारी में फंडिंग का अंदेशा
सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि इस ठगी के पैसे का इस्तेमाल सिर्फ ऐशो-आराम के लिए नहीं, बल्कि गंभीर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था। पुलिस इस एंगल पर भी बारीकी से काम कर रही है कि क्या इस ब्लैक मनी का उपयोग अवैध हथियारों की तस्करी, कारोबारियों से रंगदारी वसूलने और गैंग के नेटवर्क को मजबूत करने वाली गतिविधियों में तो नहीं किया जा रहा था।
पुराने मुकदमों की खंगाली जा रही हिस्ट्री, मोबाइल डेटा जब्त
पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला है कि पकड़े गए दोनों आरोपियों का पुराना इतिहास भी आपराधिक रहा है और इनके खिलाफ पहले भी मुकदमे दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस की टेक्निकल टीम उनके डिजिटल वॉलेट, मोबाइल कॉल डिटेल्स, चैट और बैंक स्टेटमेंट्स की बारीकी से स्क्रूटनी कर रही है ताकि इस संगठित गिरोह के बाकी चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
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