जासूसी केस में मुश्ताक को रिमांड पर भेजा गया, वित्तीय लेनदेन की जांच तेज
जैसलमेर। पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के गंभीर आरोप में घिरे संदिग्ध मुश्ताक को शुरुआती पांच दिनों की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद आज पुनः अदालत में पेश किया गया। सीआईडी इंटेलिजेंस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी से आगे की पूछताछ के लिए न्यायालय से तीन दिन की और कस्टडी मांगी थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया है। विशेष लोक अभियोजक (पीपी) सुदेश सतवान के अनुसार, इस अतिरिक्त रिमांड अवधि के दौरान आरोपी के कॉल रिकॉर्ड्स, डिजिटल डेटा और बैंक खातों के लेन-देन की गहनता से पड़ताल की जाएगी क्योंकि वह पिछले दो वर्षों से लगातार पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था।
लोकेशन पर ले जाकर की गई तफ्तीश
इससे पहले मिली पांच दिनों की रिमांड के दौरान सीआईडी की टीम आरोपी मुश्ताक को जैसलमेर के उन तमाम संवेदनशील इलाकों में लेकर गई, जहां वह निवास कर रहा था और जिनकी तस्वीरें व वीडियो उसने सीमा पार साझा किए थे। जांच एजेंसियों ने इन सभी ठिकानों पर ले जाकर घटनाक्रम का सत्यापन किया है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात का पुख्ता संदेह है कि इस जासूसी नेटवर्क में कुछ अन्य स्थानीय नागरिक भी उसकी मदद कर रहे थे। इसके साथ ही, सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान आरोपी ने कोई गोपनीय सामरिक जानकारी साझा की थी या नहीं, इस बिंदु पर भी सीआईडी हर नजरिए से जांच को आगे बढ़ा रही है।
सामरिक ठिकानों की निगरानी और पाकिस्तानी संपर्क
अब तक की पूछताछ और जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुश्ताक पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों के इशारे पर भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की गतिविधियों पर चौकस नजर रखता था। वह गूगल मैप कैम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर सटीक लोकेशन के साथ तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान भेजता था। पाकिस्तानी हैंडलर्स के निर्देश पर ही उसने क्षेत्र में एक चाय की दुकान खोली थी, जहां से लाइव फीड कैमरे लगाकर सेना के मूवमेंट की निगरानी करने की साजिश थी। तलाशी के दौरान उसके मोबाइल से 'खालिद' और 'नजीर अहमद' नाम के दो संदिग्ध नंबर मिले हैं, जो पाकिस्तान में बैठकर एजेंटों को ट्रेनिंग देने का काम करते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय नेटवर्क पर बड़े सवाल
देश की आंतरिक व राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले में सीआईडी इंटेलिजेंस लगातार कड़ियां जोड़ने में जुटी है। इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा तंत्र के सामने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जैसे कि आरोपी अब तक भारत की कौन-कौन सी गोपनीय जानकारियां सीमा पार भेज चुका है? क्या इस देश विरोधी कृत्य में सीमावर्ती इलाके के कुछ और लोग भी उसके साझीदार थे? और सबसे अहम यह कि पाकिस्तानी हैंडलर्स किस तरह स्थानीय नागरिकों को अपने जाल में फंसाकर देश के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ा जा सके।
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