सड़क हादसे में महिला की मौत, बागेश्वर धाम यात्रा के दौरान घटना
मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला रेल हादसा सामने आया है। यहाँ के हेतमपुर रेलवे स्टेशन के पास एक झूठी अफवाह ने हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां चंद सेकंड में मातम में बदल दीं। खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में अचानक 'आग लगने की अफवाह' फैलने के बाद यात्रियों में ऐसी भगदड़ मची कि जान बचाने के लिए लोग चलती ट्रेन से कूदने लगे और रेलवे ट्रैक पर भागने लगे। इसी दौरान दूसरे ट्रैक पर सामने से आ रही पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आने से तीन महिलाओं और एक मासूम बच्चे सहित कुल 4 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
अपनों को खोने वालों की दर्दनाक आपबीती
इस खौफनाक हादसे में जान गंवाने वाले लोग धार्मिक यात्राओं और अपने परिवारों के साथ लौट रहे थे। घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों और पीड़ितों ने रोते हुए उस खौफनाक मंजर को बयां किया:
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पैर कटा, फिर शरीर दो हिस्सों में बंट गया: हादसे का शिकार हुई आगरा निवासी विरमा देवी अपनी बीमारी और भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति की कामना लेकर बागेश्वर धाम (छतरपुर) दर्शन करने गई थीं। उनके भतीजे हंजसार सिंह ने बिलखते हुए बताया कि हेतमपुर के पास किसी ने ट्रेन में आग लगने की चीख मारी। डिब्बे में भगदड़ मची तो वे मौसी को लेकर बाहर कूदे। हंजसार तो ट्रैक पार कर गए, लेकिन मौसी विरमा देवी पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आ गईं। हंजसार के मुताबिक, ट्रेन से पहले उनका पैर कटा और फिर पूरा शरीर दो हिस्सों में बंट गया। इस हादसे में आगरा की ही रहने वाली एक अन्य महिला शकुंतला देवी की भी मौत हुई है।
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'आग ने नहीं, झूठी अफवाह ने निगल ली बीवी-बच्चे की जान': छतरपुर से आगरा लौट रहे नदीम खान इस हादसे में पूरी तरह टूट चुके हैं। ट्रेन में भगदड़ मचने पर नदीम ने सूझबूझ दिखाते हुए अपनी पत्नी आफरीन और 4 वर्षीय बेटे असद को पहले नीचे उतारा। इसी बीच उनका बड़ा बेटा कोच के भीतर ही छूट गया। नदीम उसे ढूंढने जैसे ही वापस पलटे, तभी पातालकोट एक्सप्रेस आई और उनकी पत्नी व छोटे बेटे को रौंदते हुए निकल गई। नदीम का रो-रोकर बुरा हाल है, उनका कहना है कि उनकी दुनिया किसी आग ने नहीं बल्कि एक कोरी अफवाह ने उजाड़ दी।
करीब 3 घंटे बाधित रहा रेल यातायात, 15 ट्रेनें प्रभावित
हेतमपुर स्टेशन के पास शाम करीब 4:15 बजे हुए इस हादसे के बाद दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर हड़कंप मच गया। सुरक्षा कारणों और ट्रैक पर बिखरे शवों के अवशेषों के चलते इस रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही को तुरंत रोक दिया गया।
यातायात बहाली: रेलवे प्रशासन, आरपीएफ (RPF) और स्थानीय पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुंचकर करीब 2 घंटे 50 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैक को साफ कराया। शाम 7:05 बजे इस मार्ग पर ट्रेनों का संचालन दोबारा शुरू किया जा सका। इस दौरान शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस सहित करीब 15 प्रमुख ट्रेनें प्रभावित हुईं, जिन्हें अलग-अलग स्टेशनों पर रोकना पड़ा।
हाईलेवल जांच के आदेश, प्रशासन ने दी तत्काल सहायता
इस वीभत्स घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच (High-Level Inquiry) के आदेश दे दिए हैं। आरपीएफ और जीआरपी इस बात की तफ्तीश कर रही है कि आखिर वह कौन व्यक्ति था जिसने ट्रेन में आग लगने की झूठी अफवाह फैलाई।
मुरैना जिला कलेक्टर ने बताया कि हादसे का शिकार हुए लोग उत्तर प्रदेश और राजस्थान के रहने वाले हैं। जिला प्रशासन की ओर से संवेदना व्यक्त करते हुए रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से सभी चारों मृतकों के परिवारों को 10-10 हजार रुपये की फौरी आर्थिक सहायता जारी कर दी गई है। इसके साथ ही, मृतकों के संबंधित राज्यों की सरकारों को भी सूचित किया गया है ताकि वहां की नियमावली के अनुसार पीड़ित परिवारों को अनुग्रह मुआवजा राशि जल्द से जल्द मिल सके।
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