पंजाब में ED का एक्शन मोड, कई शहरों में छापेमारी; केजरीवाल बोले- व्यापारी डरें नहीं
जालंधर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक विशेष टीम ने मंगलवार की सुबह पंजाब में एक बड़ी वित्तीय जांच के तहत अचानक दबिश दी। केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने शहर के पॉश इलाके न्यू जवाहर नगर में रहने वाले एक नामचीन चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) अमित बजाज के आवास पर तड़के धावा बोला। ईडी के अधिकारियों ने घर के भीतर प्रवेश करते ही बाहरी संपर्कों को काट दिया और कारोबारी के तमाम वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों व महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सघन पड़ताल शुरू कर दी। पकड़े गए सीए को पंजाब के सत्ताधारी दल के कद्दावर राजनेताओं का बेहद करीबी और मददगार माना जाता है।
पंजाब के कई शहरों में एक साथ केंद्रीय एजेंसी की ताबड़तोड़ छापेमारी
अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी की यह कार्रवाई सिर्फ जालंधर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब के कई अन्य प्रमुख शहरों में भी संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ रेड डाली गई है। हालांकि, तफ्तीश की गोपनीयता को बनाए रखने के लिए ईडी के आला अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस केस से जुड़े किसी भी व्यक्ति या व्यावसायिक प्रतिष्ठान के नाम का खुलासा नहीं किया है। लेकिन अचानक हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद से राज्य के बड़े उद्योगपतियों और कारोबारी जगत में भारी खलबली और असमंजस का माहौल पैदा हो गया है। इसके साथ ही हवाओं में यह चर्चा भी तैर रही है कि जालंधर के दो बड़े सियासी चेहरों के ठिकानों पर भी जांच टीमें पहुंची हैं।
कारोबारियों के समर्थन में उतरे अरविंद केजरीवाल और केंद्र पर साधा निशाना
केंद्रीय एजेंसियों की इस धड़ाधड़ कार्रवाई के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की है। उन्होंने पंजाब के व्यापारिक समुदाय को ढाढस बंधाते हुए साफ कहा कि सूबे के व्यापारियों को किसी भी तरह के दबाव में आने या घबराने की कतई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पंजाब की मौजूदा सरकार और पूरी पार्टी हर परिस्थिति में सूबे के व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
सियासी गलियारों में बढ़ी हलचल और बड़ी कड़ियों के जुड़ने की उम्मीद
पंजाब के भीतर पिछले कुछ समय से केंद्रीय जांच एजेंसियों की लगातार बढ़ रही सक्रियता और ताबड़तोड़ छापों ने राज्य के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। सत्ता पक्ष जहां इसे राजनीतिक द्वेष की भावना से की गई कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार मान रहे हैं। फिलहाल, सभी राजनीतिक विश्लेषकों और जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि जालंधर सहित अन्य संवेदनशील ठिकानों पर घंटों चली इस मैराथन छापेमारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय को वित्तीय हेरफेर और बेनामी संपत्ति से जुड़े क्या बड़े सुराग हाथ लगते हैं।
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