CBI ने रिमांड नहीं बढ़ाई, ट्विशा केस में समर्थ और गिरिबाला जेल में रहेंगे
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में आज, 2 जून 2026 को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह (पूर्व जज) को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट में पेश किया।
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से आरोपी मां-बेटे की रिमांड बढ़ाने की मांग नहीं की गई। इसका सीधा मतलब यह है कि कोर्ट के आदेशानुसार अब दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेजा जाएगा। जांच के दौरान दोनों आरोपियों ने अपने ऊपर लगे मारपीट, प्रताड़ना और सबूतों से छेड़छाड़ के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि ट्विशा के साथ उनके संबंध पूरी तरह सामान्य थे।
सब इंस्पेक्टर की गंभीर लापरवाही: कार में घूमता रहा मुख्य सबूत
सीबीआई की अब तक की जांच में भोपाल पुलिस की एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली लापरवाही उजागर हुई है, जिसने पूरी जांच पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं:
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कार में रखा रहा लिगेचर बेल्ट: नियम के मुताबिक, जिस लिगेचर बेल्ट के सहारे ट्विशा का शव फंदे पर लटका मिला था, उसे तुरंत फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित (Seize) किया जाना चाहिए था। लेकिन जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने इसे तुरंत जमा करने के बजाय करीब दो दिन तक अपनी निजी कार में ही रखे रहा।
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एम्स में भी नहीं कराया जमा: ट्विशा के पोस्टमार्टम के दौरान भी इस बेल्ट को एम्स (AIIMS) अस्पताल की मेडिकल टीम को नहीं सौंपा गया। बाद में जब इस लापरवाही पर सवाल उठे, तब जाकर इसे फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया।
हालांकि, स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने अब तक सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की है, लेकिन सीबीआई इस घोर लापरवाही को लेकर उन्हें बेहद जल्द पूछताछ के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी में है।
लिगेचर बेल्ट से क्यों गहराया हत्या का शक?
ट्विशा शर्मा के मायके पक्ष के लोगों ने शुरुआत से ही इस मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई थी। परिजनों का सबसे बड़ा सवाल यही था कि यदि मामला साफ तौर पर आत्महत्या का था, तो फंदे में इस्तेमाल हुई बेल्ट को पुलिस ने तुरंत सुरक्षित क्यों नहीं किया और उसे शुरुआती जांच का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया?
बाद में जब यह कड़वा सच सामने आया कि मुख्य सबूत (बेल्ट) कई घंटों तक एक पुलिस अधिकारी की कार में लावारिस स्थिति में पड़ा रहा, तो सबूतों के साथ छेड़छाड़ और हत्या की आशंका और ज्यादा गहरी हो गई। इसी रहस्यमयी घटनाक्रम के बाद मामले की कमान सीबीआई को सौंपी गई थी।
नौकरी और आर्थिक तंगी के एंगल पर भी जांच
सीबीआई इस मामले में केवल पारिवारिक विवाद ही नहीं, बल्कि ट्विशा की जिंदगी से जुड़े अन्य पहलुओं को भी खंगाल रही है:
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सैलरी न मिलना: जांच में यह बात सामने आई है कि ट्विशा शर्मा जिस निजी कंपनी में कार्यरत थीं, वहां से उन्हें पिछले ६-७ महीनों से नियमित रूप से वेतन (सैलरी) नहीं मिल रहा था।
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तनाव की वजह: जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या वेतन न मिलने के कारण पैदा हुआ आर्थिक तनाव, व्यक्तिगत रिश्तों में कड़वाहट या कोई अन्य परिस्थितियां थीं, जिसका ट्विशा की मानसिक स्थिति पर विपरीत असर पड़ा हो।
आगे की कार्रवाई: सीबीआई का कहना है कि आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े कई अन्य गवाहों और संदिग्धों को भी पूछताछ के लिए समन (नोटिस) जारी किया जा सकता है, ताकि मौत की असली वजह और पूरी साजिश का पर्दाफाश हो सके।
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