मध्य प्रदेश में बदलेगा मौसम, 34 जिलों में बारिश-आंधी की चेतावनी
भोपाल: मध्य प्रदेश में इन दिनों मौसम का एक अत्यंत दुर्लभ और विनाशकारी रूप देखने को मिल रहा है, जहां मई की झुलसाने वाली गर्मी के बजाय आसमान से आफत की बारिश हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आने वाले चार दिनों के लिए एक बार फिर चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि प्रदेश के 34 जिलों में आंधी-तूफान का असर बना रहेगा। इस बेमौसम बदलाव ने न केवल तापमान के गणित को बिगाड़ दिया है बल्कि राज्य के छह प्रमुख जिलों में ओलावृष्टि की गंभीर आशंका जताते हुए लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
आगामी दिनों के लिए मौसम विभाग की गंभीर चेतावनी
मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और रीवा में बड़े पैमाने पर ओले गिरने की संभावना है जो स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। इसके साथ ही भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और सागर जैसे बड़े संभागों सहित कुल 34 जिलों में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है। आने वाले 96 घंटों तक वायुमंडल की यह अस्थिरता पूरे मध्य प्रदेश में बनी रहेगी जिसके कारण प्रशासन ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
कुदरत के कोप से जनजीवन और फसलों को भारी क्षति
बीते दो दिनों के भीतर राज्य के 35 से अधिक जिलों ने प्रकृति के इस रौद्र रूप का सामना किया है जिसने कृषि क्षेत्र और सामान्य जनजीवन को गहरे जख्म दिए हैं। खेतों में तैयार पड़ी फसलों को ओलों और पानी ने बुरी तरह बर्बाद कर दिया है जिससे अन्नदाता के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। आंधी की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिवपुरी में बिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और कई जगहों पर खंभे गिरने से अंधेरा छा गया है।
हादसों में जान-माल का नुकसान और चुनौतीपूर्ण हालात
बेमौसम के इस तूफान ने प्रदेश के कई हिस्सों में मातम पसरा दिया है जहाँ बालाघाट जिले में तेज हवाओं की चपेट में आने से कई विशालकाय पेड़ धराशायी हो गए। इसी प्राकृतिक आपदा के दौरान एक दीवार गिरने की दुखद घटना सामने आई जिसमें एक महिला की जान चली गई। मौसम का यह जानलेवा मिजाज न केवल सड़कों पर यातायात बाधित कर रहा है बल्कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में संपत्तियों को भी व्यापक नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे उबरने में प्रशासन और जनता को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।
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