एमपी में मौसम का यू-टर्न, 42 जिलों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट
भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है और प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है. गुरुवार को 15 से अधिक जिलों में कहीं बारिश तो कहीं तेज हवाएं चलीं. मऊगंज जिले में आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला की मौत भी हो गई. मौसम विभाग के भोपाल केंद्र ने शुक्रवार के लिए 42 जिलों में खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है, जिसमें इंदौर और जबलपुर संभाग के 9 जिलों में ओले गिरने की संभावना जताई गई है।
ओलावृष्टि वाले जिलों में ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और सिवनी जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान ओलावृष्टि हो सकती है, जिसके चलते यहां ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है. इसके अलावा भोपाल, उज्जैन, इंदौर, जबलपुर समेत कई जिलों में तेज आंधी और बारिश का असर देखने को मिल सकता है।
सिस्टम की सक्रियता से बदला मौसम
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और दो ट्रफ लाइनों के कारण यह मौसम बना हुआ है. यही सिस्टम अगले चार दिनों तक असर दिखाएगा. इस दौरान कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य जगहों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।
वेस्टर्न डिस्टरबेंस का भी असर
मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि 7 अप्रैल से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, जिससे 10 अप्रैल तक प्रदेश में कहीं आंधी तो कहीं बारिश की स्थिति बनी रह सकती है. इसके बाद मौसम साफ होने लगेगा और गर्मी का असर तेजी से बढ़ेगा. अप्रैल के दूसरे सप्ताह से तापमान में तेजी आने की संभावना है, जबकि महीने के आखिरी दिनों में ग्वालियर, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे इलाकों में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में गर्म हवाएं चलने के कारण भीषण गर्मी पड़ने की आशंका है।
हीट वेव को लेकर विशेषज्ञों की राय
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अप्रैल और मई को साल के सबसे गर्म महीने माना जाता है. हालांकि इस बार मार्च के अंत में सक्रिय मौसम प्रणालियों के चलते तापमान में गिरावट देखी गई. अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम मिला-जुला रहने के संकेत हैं।
लू की स्थिति कब मानी जाती है
हीट वेव को लेकर भी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि जब तापमान सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है, तब उसे लू की स्थिति माना जाता है. मध्य प्रदेश के ज्यादातर मैदानी क्षेत्रों में 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाते ही हीट वेव की स्थिति बनती है, जबकि इससे अधिक बढ़ने पर सीवियर हीट वेव मानी जाती है।
फरवरी-मार्च में कई बार बदला मौसम
इस साल फरवरी और मार्च में मौसम ने कई बार बदलाव दिखाया. फरवरी में चार बार ओले और बारिश हुई, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा. मार्च में भी अलग-अलग चरणों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि हुई, जिससे गेहूं, पपीता और केले की फसल प्रभावित हुई. महीने के आखिरी दिनों में भी कई जिलों में मौसम बिगड़ा रहा, जिससे जनजीवन पर असर पड़ा।
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