रामनवमी पर सियासी सरगर्मी: क्या बिहार में बीजेपी देगी पहला सीएम?
पटना। भारतीय जनता पार्टी अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्यादा समय देने के विचार में नहीं है। बिहार में इतिहास रचने के लिए वह खरमास के खत्म होने का इंतजार करे, यह भी शायद संभव नहीं हो। और, मौका है रामनवमी का तो तैयारी उसी हिसाब से हो रही है। जी हां, संभव है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाने वाली पार्टी इस बार रामनवमी पर बिहार में पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री की शपथ करा ले। इसके लिए अंदर तैयारी है और बाहर माहौल बनाया जाने लगा है। खास बात यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चौंकाने वाले नाम-काम से अलग भाजपा अपनी राह खुद तैयार कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्लानिंग कभी भी सामने आ सकती है।
रोज चौंका रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा ने राज्यसभा जाने के लिए राजी कराया है, यह राज्य का बच्चा-बच्चा जानता है। लेकिन, अब यह भी लोग समझ रहे हैं कि मुख्यमंत्री भाजपा को संशय में डाल रहे हैं। इधर उन्होंने राज्यसभा का नामांकन किया और उधर समृद्धि यात्रा पर निकल गए। राज्यसभा चुनाव के दिन पटना में रहे, लेकिन वोटिंग के दौरान विधानसभा का रुख भी नहीं किया। और तो और, अगले दिन फिर समृद्धि यात्रा पर बिहार के लोगों से मिलने निकल गए। अलग-अलग जिले घूम रहे हैं। इस दौरान वह यह तो बता रहे हैं कि आगे की जिम्मेदारी कौन संभालेगा, लेकिन यह नहीं कह रहे हैं कि वह बिहार छोड़ने जा रहे हैं।
अब तक कई कंधों पर हाथ रख चुके
नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, यह उन्होंने कभी नहीं कहा। निशांत के राजनीति में आने पर भी उन्होंने एक बार भी कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ नीतीश समर्थक निशांत के लिए डिप्टी सीएम की कुर्सी पर अड़े हैं। हालांकि, नीतीश कुमार लगातार अलग-अलग संकेत देकर भाजपा को ही संशय में डाल रहे। समृद्धि यात्रा में उन्होंने सबसे ज्यादा भाजपाई डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रख आगे की जिम्मेदारी संभालने की बात कही, जबकि भाजपा के अंदर से संघ-विद्यार्थी परिषद् बैकग्राउंड वाले किसी नेता को आगे करने की चर्चा निकल रही है। नीतीश ने सम्राट चौधरी को पसंद बताया है। लेकिन, वह इसके साथ ही बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी व लेसी सिंह के अलावा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के कंधे पर भी इसी अंदाज में हाथ रख चुके हैं।
भाजपा की प्लानिंग अब आएगी सामने
चैत्र नवरात्र शुरू हो चुका है। पहले बात चल रही थी कि 15 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास के बीच नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण नहीं होगा। लेकिन, अब भाजपा की तैयारी नवरात्र में ही अपने पहले मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने की है। बिहार भाजपा में नेताओं की चर्चा के दौरान अब भी रोज कई मुख्यमंत्री बन रहे हैं और हट रहे हैं, हालांकि नवरात्र का पहला दिन निकलते-निकलते यह कहा जा रहा है कि भाजपा के रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम चर्चा कर ली है। इसपर सर्व-सहमति की तैयारी की जा रही है। कहा जा रहा है कि रामनवमी या उसके अगले दिन नई सरकार का शपथ ग्रहण करा लिया जाएगा।
नवरात्र के लिए राजनीतिक माहौल बनाया
खरमास बाद नई सरकार की चर्चा चल रही थी। कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार राज्यसभा के नए कार्यकाल के लिए अप्रैल में मौजूदा सांसदों का समय पूरा होने तक यहीं जमे रहेंगे। लेकिन, अब नवरात्र शुरू होते ही माहौल बदला है। भाजपा प्रदेश मुख्यालय के नेताओं की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास यह जानकारी पहुंचा दी गई है कि उन्हें 30 मार्च के पहले ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करनी है। वह 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, इसलिए 14 दिन ही उनके पास निर्णय के लिए बचते हैं। नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता 30 मार्च के पहले ले लेंगे तो उसके बाद उन्हें नई सरकार के शपथ ग्रहण तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखने का विकल्प हो सकता है या नहीं- इसपर भी चर्चा चल रही है। हालांकि इन चर्चाओं के बीच रामनवमी पर शपथ ग्रहण की चर्चा भाजपा में पटना से लेकर दिल्ली तक है।
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