धौलपुर में ‘संविधान सखी’ क्रांति, गांव-गांव जागी अधिकारों की अलख
धौलपुर। जिले में प्रशासन और समाज की साझेदारी से शुरू हुआ ‘चंद्रज्योति अभियान’ एक अनूठी पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। जिला परिषद के सीईओ और 2021 बैच के आईएएस अधिकारी अव्हाद निवृत्ति सोमनाथ के नेतृत्व में यह अभियान अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें राजीविका समूह की महिलाओं को ‘संविधान सखी’ बनाकर 50 डिजिटल लाइब्रेरी, जिन्हें ‘संविधान घर’ कहा जा रहा है, के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है।
डिजिटल लाइब्रेरी के जरिए शिक्षा और जागरूकता
यह पहल केवल लाइब्रेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और संवैधानिक जागरूकता का माध्यम बन रही है। इन डिजिटल लाइब्रेरी में कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-बुक्स, प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री और सरकारी योजनाओं से जुड़ा कंटेंट उपलब्ध कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को सीधे प्रशासन से जोड़ने का मार्ग खुला है।
अवहाद निवृत्ति सोमनाथ की प्रेरक यात्रा
आईएएस अव्हाद निवृत्ति सोमनाथ की व्यक्तिगत यात्रा भी इस पहल को विशेष बनाती है। तीन बार यूपीएससी में असफल रहने के बाद उन्होंने चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त की। आईआरएस बनने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को जारी रखा और 2020 में ऑल इंडिया 166वीं रैंक के साथ आईएएस बने। वर्तमान में धौलपुर में कार्यरत रहते हुए वे जमीनी स्तर पर बदलाव की दिशा में काम कर रहे हैं।
राजीविका महिलाओं की बढ़ती भूमिका
राजीविका की महिलाएं, जो पहले स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण का कार्य कर रही थीं, अब ‘संविधान सखी’ के रूप में शिक्षा और जनजागरूकता की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। वे गांव-ढाणी के लोगों को सरकारी योजनाओं, अधिकारों और समस्याओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें प्रशासन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
अनुपयोगी भवनों का ‘संविधान घर’ में रूपांतरण
अभियान की एक प्रमुख विशेषता यह है कि जिले के जर्जर और अनुपयोगी सरकारी भवनों को ‘संविधान घर’ में परिवर्तित किया गया है। ये स्थान अब सामुदायिक लर्निंग लैब के रूप में विकसित हो चुके हैं, जहां सुरक्षित वातावरण में डिजिटल संसाधनों के साथ अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में 28 डिजिटल लाइब्रेरी संचालित हो रही हैं और 50 से अधिक निर्माणाधीन हैं, जिनसे लगभग 50,000 विद्यार्थी जुड़ चुके हैं।
ग्रामीण समाज में बढ़ती भागीदारी
इस पहल का प्रभाव गांवों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विद्यार्थी, महिलाएं और बुजुर्ग इन लाइब्रेरी का उपयोग कर रहे हैं। बाल संसद, वाद-विवाद, संविधान दीवार और “CEO for a Day” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में लोकतांत्रिक समझ विकसित की जा रही है, वहीं महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है।
देश के लिए संभावित मॉडल
धौलपुर का यह मॉडल यह संकेत देता है कि विकास केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूक और सशक्त नागरिकों के निर्माण से ही स्थायी परिवर्तन संभव है। ‘चंद्रज्योति अभियान’ प्रशासन और समाज की संयुक्त भागीदारी का एक उदाहरण बनकर उभरा है, जिसे अन्य जिलों में भी अपनाया जा सकता है।
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