MP की बेटी ने रचा इतिहास, इंदौर की आकांक्षा कुटुम्बले ने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी ‘माउंट किलिमंजारो’ पर फहराया तिरंगा
MP News: पर्वतारोही आकांक्षा कुटुम्बले ने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी ‘माउंट किलिमंजारो’ (Mount Kilimanjaro) को फतह करके इतिहास रच दिया है. उन्होंने मध्य प्रदेश का नाम गर्व से ऊंचा किया है. ऐसा करने वाली कुटुम्बले भारत की चुनिंदा पर्वतारोहियों में शामिल हो गई हैं. पिछले साल ही उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी एल्ब्रुस पर चढ़ाई की थी.
‘कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा’
पर्वतारोही आकांक्षा कुटुम्बले को 19341 फीट (5895 मीटर) ऊंची माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई में कई मुश्किलों को सामना करना पड़ा. किलिमंजारो बेस कैंप से शिखर तक की ऊंचाई के लिहाज दुनिया के किसी भी अन्य पर्वत की चोटी से अधिक है. ये विषुवत रेखा (भूमध्य रेखा) के पास स्थित होने के कारण भौगोलिक परिस्थिति और मौसम अलग है. यहां कठिन मौसम परिस्थितियां होने के कारण शिखर तक ऑक्सीजन के साथ चढ़ाई करना होता है.
आकांक्षा कुटुम्बले को किलिमंजारो की चढ़ाई के दौरान सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ा. पर्वतारोहण चुनौतीपूर्ण रहा, जिसे उन्होंने साहस के साथ पूरा किया. जब वे माउंट किलिमंजारो पर चढ़ाई कर रही थीं, तब तापमान 12 डिग्री सेल्सियस था और 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही थी.
कश्मीरी कानी साड़ी पहनी
अफ्रीका के तंजानिया में स्थित माउंट किलिमंजारो को फतह करने के बाद उन्होंने कश्मीर की कानी साड़ी पहनकर भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई. अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार आकांक्षा को जम्मू कश्मीर से विशेष लगाव है. उन्होंने माउंटेनियरिंग के कोर्स भी किए. इसके साथ ही उन्होंने कई पहाड़ियों चढ़ाई करके पर्वतारोहण का अभ्यास किया. आकांक्षा पेशे से सिविल इंजीनियर हैं.
माउंट किलिमंजारो क्यों हैं इतना खास?
माउंट किलिमंजारो को दुनिया की ‘सेवन समिट्स’ (Seven Summits) में गिना जाता है.
ये विश्व का सबसे ऊंचा स्वतंत्र पर्वत है. इसके आसपास अन्य कोई पर्वत, चोटी नहीं है.
ये सवाना घास के मैदान के बीच स्थित है.
माउंट किलिमंजारो दरअसल एक निष्क्रिय ज्वालामुखी है.
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