MP में 57 हजार मजदूरों की मौत से हड़कंप, श्रम विभाग हुआ सतर्क
मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना में पंजीकृत असंगठित श्रमिकों की सामान्य और दुर्घटनाजनित मौतों की बढ़ती संख्या ने श्रम विभाग की चिंता बढ़ा दी है. इन मौतों पर हो रहे भारी खर्च को देखते हुए अब सरकार ने रोकथाम पर जोर देने का फैसला किया है. इसके तहत सभी जिलों में श्रमिकों को स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनकी निगरानी कलेक्टर करेंगे.
सामान्य मृत्यु पर 2 लाख दिए जाते हैं
मध्य प्रदेश में 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के असंगठित श्रमिक मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना में पंजीकृत हैं. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष प्रदेश में पंजीकृत श्रमिकों के बीच 57 हजार सामान्य मौतें और करीब 5,800 दुर्घटनाजनित मौतें दर्ज हुईं, जिनमें संबल योजना के तहत हितलाभ वितरित किए गए. प्रदेश की औसत आयु 67 वर्ष है, लेकिन 60 वर्ष से पहले होने वाली मौतों पर योजना के तहत सामान्य मृत्यु पर दो लाख और दुर्घटना मृत्यु पर चार लाख रुपये की सहायता दी जाती है.
प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को निर्देश जारी
हर साल 60 हजार से अधिक मामलों में हितलाभ दिए जाने से योजना पर खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसी को देखते हुए श्रम विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि जिलों में श्रमिक स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर आयोजित किए जाए. ये शिविर औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों, ईंट भट्टों, कारखानों और कृषि आधारित कार्यस्थलों पर लगाए जाएंगे. शिविरों का आयोजन मासिक ग्राम सभा और वार्ड सभाओं के साथ किया जाएगा तथा अनुग्रह सहायता योजना से जुड़े मामलों की जानकारी भी ग्राम सभा की विषय सूची में शामिल की जा सकेगी.
कार्यस्थल सुरक्षा पर सख्ती
कार्यस्थलों पर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सुरक्षा मानकों के सख्त अनुपालन के निर्देश भी दिए गए हैं. कारखानों और निर्माण स्थलों पर हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, ग्लब्स, मास्क सहित सभी आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराया जाएगा. इसके साथ ही श्रमिकों को सड़क सुरक्षा और सुरक्षित परिवहन के प्रति भी जागरूक किया जाएगा.
नियमित स्वास्थ्य जांच और समन्वय
श्रमिकों को नियमित स्वास्थ्य जांच, जैसे बीपी, शुगर, बीएमआई और कार्डियक रिस्क से जोड़ा जाएगा. उच्च जोखिम वाले श्रमिकों की पहचान कर उन्हें समय पर चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा. इसके लिए श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय से प्रत्येक जिले में संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाएगी.
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कार्यशील आयु वर्ग में मौतों के कारणों का विश्लेषण कर उन्हें रोकने के उपायों पर मासिक समीक्षा करने के भी निर्देश कलेक्टरों को दिए गए हैं. सरकार का मानना है कि निवारक स्वास्थ्य उपायों और सुरक्षा जागरूकता से श्रमिकों की मृत्यु दर घटेगी और संबल योजना पर बढ़ते खर्च को भी नियंत्रित किया जा सकेगा.
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