दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण बन रहा हार्ट अटैक का बड़ा कारण, नई रिसर्च का खुलासा
दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही दिल की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। एक नई रिसर्च में यह साफ तौर पर सामने आया है कि हवा में जहर घुलने से दिल संबंधी इमरजेंसी अगले ही दिन बढ़ने लगती है।
स्टडी में क्या निकला?
यह पायलट स्टडी जनवरी से जुलाई 2021 के बीच दिल्ली और शिमला में की गई। शोधकर्ताओं ने बड़े अस्पतालों से 41,000 से ज्यादा मरीजों के रिकॉर्ड जांचे। दिल्ली में 11,000 से अधिक दिल संबंधी इमरजेंसी केस मिले, जबकि शिमला में करीब 3,900।दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के ठीक एक दिन बाद दिल के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई। AQI में हर 10 अंकों की बढ़ोतरी पर दिल की इमरजेंसी 1.8% बढ़ी। PM10 में इतनी ही बढ़ोतरी से 1.2% का इजाफा हुआ। PM2.5 के मामले में बढ़ोतरी 2.0% तक रही। शिमला में ऐसा कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला। वहां के आंकड़े असंगत और सांख्यिकीय रूप से महत्वहीन थे।दोनों शहरों में हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इंफार्क्शन) और कोरोनरी आर्टरी डिजीज सबसे ज्यादा दर्ज हुई। हालांकि मरीजों की स्थिति में फर्क था। दिल्ली के मरीज आमतौर पर कम उम्र के थे। वे कम शारीरिक सक्रियता, ज्यादा नमक और फैट वाली डाइट, हाइपरटेंशन और मानसिक तनाव से प्रभावित थे। शिमला में तंबाकू का इस्तेमाल और लकड़ी-कोयले से खाना बनाने की आदत ज्यादा पाई गई।स्टडी के दौरान दोनों शहरों के मरीजों में कोविड संक्रमण के मामलों में कोई बड़ा अंतर नहीं था। यानी प्रदूषण का दिल पर असर पूरी तरह अलग था। यह स्टडी जर्नल में हाल ही में प्रकाशित हुआ है। इसे नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल, भारत मौसम विज्ञान विभाग और नई दिल्ली की संस्था सफ्टीनेट के शोधकर्ताओं ने मिलकर पूरा किया।
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