BRICS का बयान – अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित होगा व्यापार और अर्थव्यवस्था
अमेरिकी टैरिफ और व्यापार पर लग रहे प्रतिबंधों पर ब्रिक्स देशों ने चिंता जाहिर की है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से अलग हुई ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कहा गया कि अमेरिकी टैरिफ जैसी नीतियों से वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक विकास और व्यापार प्रभावित होने का खतरा बढ़ रहा है।
ब्रिक्स देशों की बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की। बैठक के बाद जारी की गई संयुक्त विज्ञप्ति में कहा गया कि टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों में बढ़ोतरी से वैश्विक व्यापार में और कमी आने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा उत्पन्न होने और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियों में अनिश्चितता उत्पन्न होने का खतरा है। इससे आर्थिक असमानता बढ़ सकती हैं। साथ ही वैश्विक आर्थिक विकास की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
ब्रिक्स देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात ने एकतरफा टैरिफ पर गंभीर चिंता व्यक्त की। सभी ने कहा कि यह वैश्विक व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ हैं। ऐसी चीजें ठीक नहीं हैं। इससे वैश्विक दक्षिण के हाशिए पर जाने का भी खतरा है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि बढ़ते संरक्षणवाद, टैरिफ अस्थिरता और गैर-टैरिफ बाधाओं के कारण व्यापार प्रभावित हो रहा है। ब्रिक्स को बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की रक्षा करनी चाहिए। जब बहुपक्षीय व्यवस्था दबाव में है, तब ब्रिक्स को मजबूती से खड़ा रहना होगा। एक अशांत दुनिया में ब्रिक्स को शांति, संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन का संदेश देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंगों विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए अपने सामूहिक आह्वान को और मजबूत करना चाहिए। ब्रिक्स सहयोग के अगले चरण की रूपरेखा प्रौद्योगिकी और नवाचार पर आधारित होगी। ब्रिक्स में भारत की अध्यक्षता खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन तथा डिजिटल परिवर्तन, स्टार्टअप, नवाचार और मजबूत विकास साझेदारी के माध्यम से सतत विकास पर केंद्रित होगी।
ब्रिक्स मंत्रियों ने 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता और भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए अपना पूर्ण समर्थन भी व्यक्त किया। मंत्रियों ने कहा कि वे 2026 में भारत में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की अलग बैठक की भी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मंत्रियों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
बयान में कहा गया कि उन्होंने दोहराया कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। आतंकी गतिविधियों और उनके समर्थन में शामिल सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। सभी ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता सुनिश्चित करने तथा आतंकवाद का मुकाबला करने में दोहरे मानदंडों को अस्वीकार करने का आग्रह किया।
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