बिहार की तरह अब यूपी में भी SIR से चुनावी गड़बड़ियों पर निगरानी, पंचायत व विधानसभा चुनाव के लिए नई तैयारी
लखनऊ: बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के सियासी मुद्दा बनने के बीच उत्तर प्रदेश में इसको लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के अपने हलफनामे में 1 जनवरी 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर पूरे देश में एसआईआर कराने की बात पहले ही कह चुका है। इसलिए, यूपी में भी इसकी प्रक्रियागत तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके लिए हर विधानसभा की वर्ष 2003 की स्थिति के आधार बूथ मैपिंग की जा रही है, जिससे वोटर्स तक गणना फार्म पहुंचाना आसान हो सके।
यूपी में आखिरी बार एसआईआर वर्ष 2003 में 1 जनवरी को अर्हता तिथि मानकर किया गया था। 30 जून को संशोधित वोटर लिस्ट जारी की गई थी। तबसे हर साल स्पेशल समरी रिवीजन होता है। अब 22 साल बाद गहन पुनरीक्षण होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने अपनी वेबसाइट पर 2003 की वोटर लिस्ट अपलोड भी कर दी है, जिससे लोग उस समय की अपनी स्थिति देख सकें। खास बात यह है कि 2003 में प्रदेश में वोटर की संख्या 6 करोड़ से भी कम थी। अब यह संख्या ढाई गुना से भी अधिक बढ़कर 15.35 करोड़ हो चुकी है। अभियान में जोर डुप्लीकेट, अवैध, मृत वोटरों को हटाने पर होगा।
बूथों की मैपिंग के बाद बीएलओ करेंगे मिलान
उत्तर प्रदेश में आखिरी बार 2008 में विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का परिसीमन हुआ था। इसके चलते बहुत से क्षेत्रों का भूगोल बदल चुका है। वहीं, बूथों की स्थिति में भी बदलाव आया है। इसके चलते बूथ संख्या भी बदली है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि सभी जिलों को पहले चरण में इनके ही मिलान के निर्देश दिए गए हैं। 2003 के बूथ और अब उसकी नवीन संख्या कामिलान हो जाने से दोनों ही समय के वोटर लिस्ट से वोटरों का मिलान संभव हो सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में इसके आधार पर इनका गणना प्रपत्र तैयार करना आसान हो जाएगा। इसके साथ ही सभी जिलों से ईआरओ और मास्टर बीएलओ की ट्रेनिंग कराई जा रही है, जो नीचे सभी बीएलओ को सिर की प्रक्रिया की ट्रेनिंग देंगे।
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