जब काका बने सुपरस्टार और शम्मी कपूर रह गए पीछे, आशीष विद्यार्थी ने सुनाई दास्तान
मुंबई: एक वक्त था जब शम्मी कपूर की लोकप्रियता शिखर पर थी। फिर काका यानी राजेश खन्ना का सिनेमा में उदय हुआ। इसके बाद शम्मी कपूर के सितारे कुछ फीके पड़ने शुरू हुए। वक्त बदलने के साथ इंडस्ट्री में लोगों का रवैया कैसे बदलता है? इसे लेकर शम्मी कपूर ने आशीष विद्यार्थी को एक सीख दी थी। हाल ही में अभिनेता ने वह किस्सा शेयर किया।
स्टारडम और लोकप्रियता को लेकर दी थी सीख
हाल ही में सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में आशीष विद्यार्थी ने बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शम्मी कपूर से मिली जिंदगी की उस अनमोल सीख को याद किया। शम्मी कपूर ने दरअसल, अभिनेता को इंडस्ट्री में लोकप्रियता और क्षणभंगुर स्टारडम को लेकर बेबाक राय दी थी। उन्होंने दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों के मूव ऑन करने के तौर-तरीके पर बात की। आशीष विद्यार्थी ने कहा कि 60 के दशक के लोकप्रिय कलाकार शम्मी कपूर की राजेश खन्ना के स्टारडम को लेकर एक मजाकिया टिप्पणी ने उन पर गहरी छाप छोड़ी।
घटती भीड़ पर लोग शम्मी कपूर से करते थे सवाल
आशीष विद्यार्थी ने कहा कि एक दिन शारजाह में शम्मी कपूर से उनकी अचानक मुलाकात हुई थी। वे अपनी टीवी सीरीज 'दास्तान' की शूटिंग कर रहे थे और शम्मी कपूर भी किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में वहां आए थे। इस दौरान शम्मी कपूर ने उन्हें सलाह दी कि फिल्म इंडस्ट्री बहुत कठोर और बहुत जल्दी राय बनाने वाली हो सकती है। शम्मी कपूर ने एक्टर को बताया था कि खुद उनका स्टारडम जब फीका पड़ने लगा, तो लोग उनसे घटती भीड़ के बारे में पूछते थे। तब शम्मी कपूर का मजाकिया जवाब था कि 'भीड़ बस आगे बढ़ गई है- जेश खन्ना के बंगले, आशीर्वाद पर'।
'सफलता को संजोना जरूरी है, लेकिन..'
शम्मी कपूर की इस बात ने आशीष विद्यार्थी को लोकप्रियता और नजरिए को लेकर एक सबक मिला। आशीष विद्यार्थी ने उस मुलाकात को याद करते हुए कहा कि यह घटना वर्षों तक उनके साथ रही। उन्होंने बताया कि शम्मी कपूर का मैसेज साफ था कि लोग आखिरकार आगे बढ़ जाते हैं। जो लोग कभी आपकी सफलता का जश्न मनाते थे, वे भी आपसे दूर जा सकते हैं और आपकी उपलब्धियां आपकी किस्मत पर निर्भर करती हैं। सफलता को संजोना जरूरी है, लेकिन यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि यह हमेशा रहेगी।
'अंदाज' में शम्मी कपूर ने राजेश खन्ना के साथ शेयर की स्क्रीन
बता दें कि 60 के दशक में शम्मी कपूर की लोकप्रियता बहुत ज्यादा थी। 70 के दशक की शुरुआत में राजेश खन्ना का दौर शुरू हुआ। फिर अमिताभ बच्चन 'एंग्री यंग मैन' के रूप में उभरे। दिलचस्प बात यह है कि शम्मी ने पहली बार रमेश सिप्पी की फिल्म 'अंदाज' में राजेश खन्ना के साथ स्क्रीन शेयर की, जहां राजेश खन्ना स्पेशल अपीयरेंस में दिखे। 14 अगस्त 2011 को शम्मी कपूर ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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