मध्य प्रदेश के फूल पूरी दुनिया में बिखेर रहे खुशबू, फ्लावर फार्मिंग से मोटा पैसा कमा रहे किसान
इंदौर: कभी आलू, प्याज, गेहूं और सोयाबीन के लिए पहचान रखने वाला मालवा अंचल अब फूलों की खुशबू से महक रहा है. इंदौर समेत मध्य प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर फूलों की खेती हो रही है. यहां के किसान अब पारंपरिक खेती से व्यवसायिक खेती की तरफ अग्रसर हो गए हैं. फूलों की खेती से किसानों की अच्छी कमाई भी हो रही है. मध्य प्रदेश अब देश में फूल उत्पादन में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है.
इंदौर में 5000 हेक्टेयर पहुंचा फूलों का रकबा
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के तेजाजी नगर, रालामंडल, हरसोला, कैलोद और करताल जैसे क्षेत्रों में फूलों की खेती का रकबा अब 4768 हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 5000 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है. यहां गेंदा, गुलाब, जरबेरा, सेवंती, ग्लैडुलस और रजनीगंधा जैसे फूलों की खेती जोरों पर है. इन फूलों की मांग देश के बड़े शहरों के अलावा विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है. इस वजह से यहां का किसान इन फूलों की खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और लाभ कमा रहा है.
गुलाब के कट फ्लावर की विदेशों तक पहुंच
इंदौर के गुलाब, गेंदा, मोगरा, कांगड़ा और जूही के फूल अहमदाबाद, सूरत, कानपुर, लखनऊ, जयपुर और कोटा जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर भेजे जा रहे हैं. इसके अलावा गुना में पैदा होने वाला गुलाब को जयपुर, दिल्ली, मुंबई के अलावा पेरिस और लंदन में भी एक्सपोर्ट किया जा रहा है. इससे क्षेत्र के किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है और फूलों की खेती को एक नया बाजार मिल गया है.
चार सालों में दोगुना हुआ फूलों का उत्पादन
2021-22 में फूलों का उत्पादन जहां 37,648 टन था. वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 5 लाख 12,914 टन तक पहुंच गया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इससे फूल के उत्पादन में भी वृद्धि हुई है. इस साल 86,294 टन फूलों का उत्पादन हुआ. प्रदेश में फूलों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 15.01 मैट्रिक टन है जो काफी बेहतर मानी जाती है. जलवायु और मिट्टी की अनुकूलता, साथ ही सिंचाई सुविधाओं में सुधार ने किसानों को पारंपरिक फसलों की बजाय फूलों की खेती की ओर प्रेरित किया है. सीमांत और छोटे किसान अपनी पारंपरिक खेती के स्थान पर उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं और दुगना मुनाफा कमा रहे हैं.
मध्य प्रदेश उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर में फूलों की खेती का रकबा इस प्रकार है-
फूल रकबा
गेंदा 24,214 हेक्टेयर
गुलाब 4,502 हेक्टेयर
सेवंती 17,009 हेक्टेयर
ग्लैड्यूलस 1,058 हेक्टेयर
रजनीगंधा 263 हेक्टेयर
अन्य फूल 11,227 हेक्टेयर
ग्वालियर में तैयार होगी हाईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी
प्रदेश में फूल उत्पादन को और अधिक वैज्ञानिक तरीके से बढ़ावा देने के लिए ग्वालियर में 13 करोड़ रुपए की लागत से एक हाईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी विकसित की जा रही है. यहां फूलों की उन्नत किस्में तैयार की जाएंगी, किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और उत्पादन में नवीन तकनीकों पर शोध होगा. सरकार का लक्ष्य कुल उद्यान फसलों में 33 फीसदी से अधिक फूलों की खेती को स्थान दिलाना है.
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