शक्ति कानून शक्तिहीन!..भगवान भरोसे महिलाओं की सुरक्षा
मुंबई। मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र से आए दिन महिलाओं और बच्चियों के साथ अत्याचार की खबरें आती रहती हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन महाविकास आघाड़ी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए शक्ति कानून तैयार किया था। इसमें दोषी को फांसी पर लटकाए जाने का भी प्रावधान था, लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि महायुति सरकार इस कानून को जल्दी लागू करने के पक्ष में नहीं नजर आ रही है। इसे देखते हुए यह स्पष्ट होता जा रहा है कि ईडी सरकार में महिलाओं की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है, क्योंकि इस कानून पर कछुए की गति से काम चल रहा है। यही कारण है कि लंबे इंतजार के बाद अब जाकर सरकार ने विधेयक में संशोधन के लिए समिति गठित की है। इस समिति को दो महीनों में रिपोर्ट पेश करने लिए कहा गया है।
छह महीने बाद समीक्षा के लिए गठित हुई समिति
पुणे के स्वारगेट एसटी बस डिपो में महिला के साथ विधेयक में संशोधन के लिए समिति गठित की है। इस समिति को दो महीनों में रिपोर्ट पेश करने लिए कहा गया है।छह महीने बाद समीक्षा के लिए गठित हुई समितिहुए बलात्कार का मामला पूरे देश में गूंजा था। इसे लेकर विपक्षी दलों के साथ ही जनता में पैâले आक्रोश के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि शक्ति विधेयक में मौजूदा कई कानूनी प्रावधानों को फिर से तैयार किया गया था। केंद्रीय गृह विभाग ने कुछ आपत्तियां भेजी थीं, जिनमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के पैâसलों का भी उल्लंघन किया गया है। राज्य को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। इसमें कुछ बदलाव करने की जरूरत थी, लेकिन इससे पहले कि हम बदलाव कर पाते, केंद्र ने नए कानून ला दिए। इन कानूनों में हमारे विधेयक में दिए गए ज्यादातर प्रावधानों को समाहित कर दिया गया है इसलिए अब हम विधेयक की समीक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर इसे जरूरी संशोधनों के साथ वापस लाएंगे।
तत्कालीन महाविकास आघाड़ी सरकार ने वर्ष २०२१ में महाराष्ट्र विधानसभा ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए सख्त कार्रवाई करने के लिए पारित किया था। यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए लंबित है। हालांकि, मौजूदा महायुति सरकार द्वारा विधेयक लाने में देरी के लिए विपक्ष कई बार आलोचना कर चुका है। विपक्ष मांग कर चुका है कि राज्य सरकार इस पर तुरंत कार्रवाई करे। राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख तक कह चुके हैं कि विधेयक को लाने में बहुत देरी हो चुकी है। सरकार को इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी लेने के लिए काम करना चाहिए। पुणे बलात्कार मामले के छह महीने के बाद महायुति सरकार ने शक्ति विधेयक को लेकर छह सदस्यीय समिति गठित की है। छह सदस्यीय समिति गठित करने का विचार राज्य सरकार द्वारा किया गया था, जिसे मंजूर कर लिया गया है। इस समिति की कार्य सीमा और जिम्मेदारियां दी गई हैं कि शक्ति फौजदारी कानून का तुलनात्मक अध्ययन करना है।
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