झारखंड में कोरोना संक्रमित मरीज की सेप्टिक शॉक से मौत
रांची। रिम्स में इलाजरत कोविड से संक्रमित एक मरीज की मौत सेप्टिक शॉक के कारण मंगलवार को हो गई। 44 वर्षीय मरीज को दो जून को सीआईपी रांची से रिम्स रेफर किया गया था।
मरीज को खाना गले में फंस जाने की वजह से दिल का दौरा पड़ा और सांसे रुक गई, जिसके पश्चात उसे सीपीआर दिया गया और बचाने की कोशिश की गई। वेंटिलेटर सपोर्ट के लिए रिम्स लाया गया।
जांच में एस्पीरेशन निमोनिया की पुष्टी हुई। इस कारण ट्रामा सेंटर में वेंटीलेटर पर रखा गया। इसके अलावा मरीज को कई अन्य प्रकार की बीमारियां भी पहले से थी।
पांच जून को भर्ती मरीजों की जांच में मरीज को कोविड पॉजिटिव पाया गया। रांची में 12 कोरोना के एक्टिव केस है, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
रिम्स चिकित्सकों के अनुसार मरीज की मृत्यु सेप्टिक शॉक की वजह से हुई है जिसमें मुख्यतः सर्कुलेटरी फेल्योर होता है न रेस्पिरेटरी फेल्योर जो कि आम तौर पर कोविड मरीजों में मौत का कारण होता है।
सेप्टिक शॉक एक जानलेवा स्थिति होती है जो तब होती है जब शरीर को किसी संक्रमण से लड़ने की प्रक्रिया खुद शरीर को नुकसान पहुंचाने लगती है। यह सेप्सिस का गंभीरतम चरण होता है।
सेप्टिक शॉक क्या है?
जब शरीर में कोई संक्रमण (फेफड़ों, पेट, मूत्र मार्ग, या त्वचा ) बहुत अधिक फैल जाता है, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक प्रतिक्रिया देने लगती है। यह प्रतिक्रिया सिस्टमिक इनफ्लेमेटरी रिस्पांस पैदा करती है, जिससे रक्तचाप बहुत कम हो जाता है। अंगों (जैसे कि किडनी, लिवर, ब्रेन) तक खून की आपूर्ति कम हो जाती है।आक्सीजन की कमी होने लगती है। कई अंग एक-एक करके काम करना बंद करने लगती है।
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