पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत भीषण गर्मी से निपटने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा : पी.के. मिश्रा
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने बताया है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने भीषण गर्मी से निपटने के लिए एक सोची-समझी और आगे की सोच वाली रणनीति तैयार की है। जिनेवा में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कि बढ़ता तापमान सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता और पारिस्थितिकी लचीलेपन के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर रहा है। पीएमओ की ओर से जारी बयान के अनुसार, डॉ. मिश्रा ने कहा, भारत संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (यूएनडीआरआर) की भीषण गर्मी के जोखिम प्रबंधन के लिए साझा ढांचा पहल का स्वागत करता है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि भारत अब केवल आपदाओं का जवाब देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देश ने तैयारी और बचाव की एकीकृत रणनीतियां अपनाई हैं। 2016 से, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने हीटवेव प्रबंधन पर व्यापक राष्ट्रीय दिशा-निर्देश विकसित किए हैं, जिन्हें 2019 में संशोधित किया गया, जिसने विकेंद्रीकृत हीट एक्शन प्लान की नींव रखी। उन्होंने अहमदाबाद के हीट एक्शन प्लान की तारीफ की, जिसने दिखाया कि कैसे समय पर चेतावनी, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और समुदाय तक पहुंच से लोगों की जान बच सकती है।
प्रधान सचिव ने कहा, भारत में गर्मी से प्रभावित 23 राज्यों के 250 से अधिक शहरों और जिलों में हीट एक्शन प्लान क्रियाशील हैं, जिन्हें एनडीएमए की सलाहकारी, तकनीकी और संस्थागत तंत्रों का समर्थन प्राप्त है। भारत का दृष्टिकोण समग्र सरकार और समग्र समाज का है, जिसमें स्वास्थ्य, कृषि, शहरी विकास, श्रम, बिजली, जल, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े मंत्रालय शामिल हैं।
उन्होंने जो देकर कहा कि त्वरित और प्रभावी आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत किया जाना चाहिए। मिश्रा ने पुष्टि की कि भारत शहरी ताप द्वीप (यूएचआई) आकलन को शहरी नियोजन में एकीकृत कर रहा है। उन्होंने वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर स्थानीयकृत ताप-आर्द्रता सूचकांक विकसित करने पर वैश्विक ध्यान केन्द्रित करने की अपील की, ताकि पूर्व चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाया जा सके, भवन प्रौद्योगिकियों और निष्क्रिय शीतलन नवाचारों को आगे बढ़ाया जा सके, जो किफायती और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त हों तथा समानता संबंधी चिंताओं का समाधान किया जा सके, क्योंकि अत्यधिक गर्मी महिलाओं, बाहरी श्रमिकों, बुजुर्गों और बच्चों को असमान रूप से प्रभावित करती है।
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