बालसमंद नहर में मिली युवती की लाश, हत्या के आरोप में युवकों की गिरफ्तारी की मांग
बालसमंद नहर में करीब चार महीने पहले 20 साल की युवती का शव मिला था। मृतका के परिजनों ने उसके साथ रहने वाले युवकों पर सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या कर शव को नहर में फेंकने के आरोप लगाए थे। मामला कई दिनों तक उछला था।
नहीं हुआ सामूहिक दुष्कर्म, हत्या की बात भी निकली झूठी
पुलिस ने शव के पोस्टमार्टम के बाद विसरा और अन्य सैंपल जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजे थे। सैंपलों की रिपोर्ट अब आ चुकी है। युवती के साथ कोई सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ और न ही उसकी हत्या की गई थी। पानी में डूबने से युवती की मौत हुई थी। पुलिस अब रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई अमल में लाएगी।
9 नवंबर 2024 में मिला था शव
जानकारी अनुसार कैमरी रोड स्थित एक कॉलोनी में रहने वाली 20 साल की युवती डाबड़ा चौक के पास एक निजी कंपनी के ऑफिस में काम करती थी। 8 नवंबर की सुबह वह आठ बजे घर से काम पर जाने के लिए निकली थी। रोजाना शाम को वह शाम छह बजे घर पहुंच जाती थी, लेकिन उस दिन वह घर नहीं पहुंची। अगले दिन 9 फरवरी की शाम को उसका शव बालसमंद नहर में मिला था। उसके बाद अगले दिन स्वजन सिविल अस्पताल में सीएमओ कार्यालय के बाहर एकित्रत हुए और शव लेने से इनकार कर दिया था।
पुलिस ने गुमशुदगी की दर्ज की थी शिकायत
उस समय युवती के भाई ने बताया था कि आठ नवंबर को घर न पहुंचने के बाद बहन के पास फोन किया था। उसने बताया था कि वह अपनी सहेली के साथ है और पीएलए मार्केट जा रही है। उसके बाद बहन का फोन बंद आने लगा। अपने स्तर पर बहन की तलाश की तो उसका कहीं कोई अता-पता नहीं चला। जब बहन का पता नहीं चला तो आजाद नगर थाना पुलिस को सूचना दी। वहां पर मौजूद पुलिस कर्मचारियों ने अर्बन एस्टेट थाना में भेज दिया था। यहां पर पुलिस ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की। नौ नवंबर की रात आठ बजे बहन का शव बालसमंद नहर में मिलने की सूचना मिली।
मृतका के भाई ने साथ पढ़ने वाले युवक पर लगाया था गंभीर आरोप
मृतका के भाई ने आरोप लगाया था कि जब बहन पढ़ती थी तो उसके साथ पढ़ने वाला युवक काफी समय से उस पर शादी करने का दबाव बना रहा था। साजिश के तहत बहन की सहेली ने उसको पीएलए ले गए। उसके बाद शादी का दबाव बनाने वाले युवक और उसके साथी मेरी बहर के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या करने के बाद शव को बालसमंद नहर में फेंक दिया। स्वजन आरोपित की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े थे। संगठनों ने उसके बाद लगातार दो दिन तक प्रदर्शन किए और बाद में पुलिस से मिले आश्वासन के बाद स्वजनों ने शव उठाया था।
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