बदलेगा संस्कृत विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम
भोपाल । केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति-2020 के तहत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। विश्वविद्यालय 2025-26 सत्र से चार वर्षीय शास्त्री (यूजी) और एक वर्षीय आचार्य (पीजी) पाठ्यक्रम शुरू करेगा। नई व्यवस्था में छात्रों को कई विकल्प मिलेंगे। दो सेमेस्टर पूरा करने पर सर्टिफिकेट, चार सेमेस्टर पर डिप्लोमा और छह सेमेस्टर पूरा करने पर शास्त्री की डिग्री मिलेगी। आठ सेमेस्टर पूरा करने वाले छात्रों को शास्त्री (शोध प्रतिष्ठा) की उपाधि दी जाएगी। दस सेमेस्टर पूरा करने वाले छात्र सीधे आचार्य या स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे।
पाठ्यक्रम में मेजर-माइनर विषयों का संगम होगा। वेद, ज्योतिष, व्याकरण, साहित्य, दर्शन जैसे पारंपरिक विषयों के साथ राजनीति विज्ञान, इतिहास, अंग्रेजी और हिंदी जैसे आधुनिक विषय भी शामिल हैं। कौशल विकास के तहत योग, कंप्यूटर, संगीत, नाट्य कर्मकांड, ज्योतिष और वास्तु की शिक्षा दी जाएगी। हर सेमेस्टर में मुख्य विषय 100 अंकों का होगा। इसमें 60 अंक की लिखित परीक्षा और 40 अंक का सतत मूल्यांकन शामिल है। रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सभी छात्रों के लिए प्रशिक्षुता अनिवार्य की गई है। छात्रों को माइनर कोर्स के साथ ही इंटर डिसीप्लीनरी विषय और कौशल एवं दक्षता विकास, नैतिक मूल्य विषयों की पढ़ाई भी करनी होगी। दक्षता विकास में भाषाएं और कौशल विकास में योग, कंप्यूटर, संगीत, नाट्य कर्मकांड, ज्योतिष, वास्तु आदि विषय होंगे।
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